Thursday, March 3, 2011

किसानों के कत्लेआम का "पॉवर " ...

आन्ध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में 28 फरवरी 2011 को जो कुछ हुआ,उसे सुनेंगे तो आप सुलग जाएंगे ।आजाद भारत में रोंगटे खड़े कर देने वाले इस जघन्य हत्याकांड की गौरवगाथा लिखने के लिए आन्ध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने किसानों का कत्लेआम करवा दिया।सदियों से पहले इस देश को अंग्रेजों ने लूटा,पुर्तगालियों ने लूटा,डचों ने लूटा फिर मुगलों ने लूटा जो बच गया उसे कांग्रेस सरकार ने लूट लिया।मुहम्मद गजनवी,मुहम्मद गोरी और तैमूर लंग के खानदार की सियासी हवस को आन्ध्र प्रदेश के सीएम किरण रेड्डी आगे बढा रहे हैं ।विदेशी अताताईयों की बर्बरता भी किरण रेड्डी के बुलंद हौसले को देखकर शर्मिन्दा है।श्रीकाकुलम के काकरापल्ली गांव में ईस्ट कोस्ट एनर्जी प्रा.लि. अपनी थर्मल पॉवर प्लान्ट लगाने के लिए 30400 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है।जिसका 25 से अधिक गांवों ने विरोध किया।इस विरोध पर आन्ध्र सरकार ने मौत का इंसाफ किया है।30400 एकड़ जमीन कंपनियों के चंगुल से बचाने के लिए किसानों का जत्था वद्दीतन्द्रा गांव में चुपचाप अनशन कर रही थी।28 फरवरी 2011 को देखते ही देखते वद्दीतन्द्रा गांव जवानों की छावनी बन गयी।इस घेराव की भनक जैसे ही गांव वालों लगी उनका विरोध मुखर हो गया।जैसे ही जवानों को इशारा मिला....पूरे गांव को घेर कर किसानों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दी।गांव वाले जिन्दा थे और जिन्दादिल भी।किसानों ने डंडा और पत्थर से मोर्चा संभाल लिया।पुलि पल्टन से आमना सामना होते ही भूखे-नंगे किसानों की जान पर बन आयी।कुछ तो मौत से पहले ही मर गए और कुछ मौत की पीठ पर सवार हो गए।जान की बाजी लगाकर किसानों ने खाकी के खैरख्वाहों को खदेड़ दिया।लेकिन सूबे की सरकार तो किसानों के कत्लेआम करने पर अमादा थी।झोक दी पूरी ताकत।इस जुल्म पर आस पास के किसान भी भड़क गए।सिंगूर,नन्दीग्राम,टप्पल,आगरा,मथुरा के बाद श्रीकाकुल में किसानों का विरोध मौत का पैगाम बन गयी।जज्बातों की आंधी में जुर्म के मुहावरे बदल गए।कायर शूरवीरों ने माहौल बेकाबू होते देख किसानों के सीने पर गोलिया बरसाने लगे।किसानों को बेमौत मरते देख गांव की महिलाओ को सूर्या और परिमला बनते देर नहीं लगी।हाथ में जो बर्तन,डंडा,पत्थर आया यमराज के ऐजेन्टों को दे मारा।भागने का मौका तो कायर खोजते है....यहां तो गोलियां खाने के लिए सीने को चौड़ा कर रहे थे।इस विश्वास से की जीते जी अपनी जमीन को कंपनी के हाथ नहीं लगने देंगे।और हुआ भी वही।लेकिन रोक लगने से पहले बारूद की आग घरों तक पहुंच गयी...झोपड़ियों और कच्चे मकानों में रहने वाले किसानों के घर धधक उठे।कागजात.कपड़ा,कैश, अनाज कुछ नहीं बचा।घायल किसान अपनी ही जमीन पर कराह रहे थे..तड़प रहे थे...तिलमिला रहे थे।और आन्ध्र प्रदेश की सरकार इस मातम के तोहफे को तमगा बनाकर कंपनी के गले में डाल दीवद्दीतन्द्रा गांव से निकली चिंगारी, सियासी गलियारों में आग लगा रही है।घटना के 24 घंटे बाद चन्द्रबाबू नायडु पहुंचते हैं।जैसे हमदर्दी का लाइसेंस सिर्फ नायडु के पास हो।ऐसा कोई नेता नहीं बचा जिसने दो मिनट का सियासी शोक ना रखा हो।अंहिसा के औजार पर लोभ और लाभ का ऐसा वार किया कि गांधी जी की आत्मा सौ बार मरी होगी।ये जानने के लिए की क्या एक कंपनी की जरूरतें जिंदगी से बड़ी हैं।निहत्थे किसानों के सीने पर गोली बारूद खाली कर कायर शूरवीर तो परमवीरचक्र के दावेदार ही बन गए।धैर्य रखें...जालिमों की जमात के इस जश्न पर एक और जलिया वाला बाग कांड करवट ले रहा है।


3 comments:

  1. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए तथा प्रत्येक भारतीय लेखको को एक मंच पर लाने के लिए " भारतीय ब्लॉग लेखक मंच" का गठन किया गया है. आपसे अनुरोध है कि इस मंच का followers बन हमारा उत्साहवर्धन करें , साथ ही इस मंच के लेखक बन कर हिंदी लेखन को नई दिशा दे. हम आपका इंतजार करेंगे.
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  2. इस नए सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  3. kisaan hamesha se hi himmatwala raha hai...wo janta hai chichilati dhup mein pasine ki boond se kaise dharti paseejti hai ... aur fasal leh lahati hai ... krodh ki is loo (garam hawa)ki taap... AC mein baithane wale nai jaan payenge ... aur Jaan nahi paaye toh yakinan Jaan se jayeinge ...

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