Tuesday, January 15, 2019

देश को 'देशद्रोह में पीएचडी' करने वालों से आजादी कब मिलेगी ?


NDTV पर
मोन्टाज खत्म होते ही....
बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ (ढिंचक..ढिंचक...ढिंचक)
रोजाना की तरह टीवी स्क्रीन पर ज्वलनशील मुस्कान के साथ 'अवतरित' होते ही मुंह खुलता है।
नमस्कार...। मैं र... विष कुमार 
अभिव्यक्ति की इतनी बड़ी सजा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में मिल रही है और आप गाय, गीता और मंदिर के मसले पर उलझे हैं। क्या हो रहा है समाज में ? मोदी सरकार आखिर क्यों इन बेगुनाहों के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। क्या वो भगवा एजेंडे पर काम कर रही है। अगर ऐसा नहीं है तो बिहार के गरीब तबके से आये 'कन्हैया कुमार' के खिलाफ पिछले 3 साल में जो सरकार सबूत तक नहीं जुटा पाई उसी 'कन्हैया कुमार' के खिलाफ 1200 पन्ने का चार्जशीट कैसे 'दाय'र कर दिया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस साजिश का शिकार सिर्फ 'गरीब' कन्हैया ही नहीं है उसकी 'संगीत मंडली' में 'ढपली' बजाकर 'जीवन यापन' करने वाले 'उमर खालीद' और मेहनत मजदूरी कर लुटियन की दिल्ली में शिक्षा लेने आये 'अनिर्बान भट्टाचार्य' जैसे एक नहीं, दो नहीं पूरे दस सीधे-साधे 'बुजुर्ग' विद्यार्थी हुए हैं। क्या इस देश में अब 'आजादी' की बात करना गुनाह है। क्या इस देश में अब कोई 'नारे' भी नहीं लगा सकता है। क्या किसी 'भटके' हुए व्यक्ति के फांसी' के खिलाफ आवाज भी नहीं 'बुलंद' कर सकता। आपका 'दम 'घुटे या न घुटे इस सरकार में कई लोगों के 'दम' घुट रहे हैं। यहां की फिजाओं में जहर की खेती हो रही है। अघोषित आपातकाल की स्थिति से यह देश गुजर रहा है। आज कन्हैया कुमार और उनके मासूम मित्र इस सरकार के शिकार हुए हैं कल आप भी हो सकते हैं। इसमें पूरी गलती मोदी सरकार की है, 3 साल तक कन्हैया कुमार के खिलाफ कुछ नहीं कर पाई अब चुनाव आते ही चार्जशीट दायर कर रही है। आप समझते हैं दिल्ली पुलिस बहुत चुस्त है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। नागपुर से आदेश आने के बाद ही कन्हैया कुमार का नाम चार्जशीट में दायर किया गया। मोदी जी आखिर कैसा देश बनाना चाहते हैं। भाजपा वाले कह रहे हैं....लेकिन उनके कोई प्रवक्ता हमारे टीवी पर आने को तैयार नहीं है ..ब्लां....ब्लां...ब्लां।
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नोट- अब 'बवासीर कुमार' को कौन समझाए। इस मुद्दे पर जैसे NDTV 'अपना काम' कर रही थी वैसे ही दिल्ली पुलिस 'अपना काम' कर रही है

Saturday, January 12, 2019

इसे ही कहते हैं...लव जिहाद

लव जिहाद' को कोरी कल्पना कहने वालों इस 'खबर' को जरा ध्यान से पढ़ लो। 'आसमानी किताब' की आयतों को मानने वाले इन डरी हुई कौमों के 'शांतिदूतों' की हरकत और हिमाकत तो देखिए। पहले लड़की को एडिट फोटो से 'ब्लैकमेल' किया फिर 'गोमांस' खाने व 'नमाज' पढ़ने का दबाव बनाया और जब इससे भी मन नहीं भरा तो दुबई 'बेचने' की पूरी तैयारी कर ली। यह मामला 'बाड़मेर' का है। जम्मू कश्मीर का रहने वाले एक शांतिदूत 'गुलजार' ने इस काम को अंजाम दिया। शुक्र है लड़की किसी तरह वहां से बचकर अपने घर पहुंच गयी। खैर हमको क्या हम तो अभी सेक्युलरिज्म का पट्टा डाले 'हामिदों' और 'नसीरों' के बयान का 'समर्थन' करने में लगे हैं। इस मसले पर फिर कभी सोचा जाएगा।