Monday, February 13, 2012

ऐसे "बयानों" ने बनाया आचार से "लाचार" संहिता

झूठ का कोई पैर नहीं होता इसलिए वो ज्यादा दूर तक नहीं जा सकता।"खुर्शीद की परम बेलगाम बदजुबानी इस कड़वी सच्चाई की एक ऐसा छोर है ,जिसे कांग्रेस के थामते ही देश पर फजीहत का बोझ बन गयी "। खुर्शीद को वोट की राजनीति से परे खुछ भी नहीं दिखता।सबकुछ वोट के चश्मे से देखने की आदत पड़ गयी है।"चुनाव आयोग की ऐलान से दो दिन पहले कांग्रेस ने आरक्षण का ऐसा दाव खेला कि मुम्मद गोरी से लेकर नादिरशाह की लूटेरों की आत्मा भी इस बयान पर शर्मिंदगी के दलदल मे डूब मरीं होंगी "।खुर्शीद ने अपनी पत्नी लुईस खुर्शीद के एक चुनावी सभा में कहा था कि मु्स्लिमों को 4.5 नहीं 9 फीसदी आरक्षण मिलेगा।इस तेजाबी बयान के बाद चुनाव आयोग ने जवाब तलब करके "ऐसे बयान से बचने को कहा था लेकिन खुर्शीद के अंदर का अलाउद्दीन खिलजी कहां मानने वाला"
























खैर ये घटना आयी गयी हो गयी लेकिन दस फऱवरी को आजमगढ़ की एक सभा में खुर्शीद बाटलाकांड पर बोलते बोलते ऐसे बहके की सिसायत की सारी धारणाएं ध्वस्त हो गयी।कहा कि, बाटलाकांड की तस्वीरें देखकर सोनिया रो पड़ी थी"। इस बयान ने भारतीय राजनीति में आंसूओं को ऐसे किरदार के रूप में स्थापित कर दिया कि "जिसका जिक्र जब-जब आएगा सोनिया के आंसूओं का हिसाब लिया जाएगा""आजमगढ़ से बाहर निकलकर फर्रूखाबाद पहुंचते-पहुंचते खुर्शीद के आंसू सूख गए"।जब मीडिया ने सोनिया के आंसूओं की हकीकत पूछा तो खुर्शीद ने कहा कि मैं अपने नेता को ऐसे कैसे कह सकता हूं।"सिर के बल उलट गए खुर्शीद....कहा कि मैं अपने नेता को ऐसे कैसे कह सकता हूं।सही कहा खुर्शीद साहब...आप के ऊपर तो सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का भूत सवार हो गया था।ऐसी बदजुबानी पर सरकार ने सब्सिडी देकर बाकि पार्टीयों के साथ अन्याय किया है"।खुर्शीद की खता चुनाव आयोग को खटकी तो दिग्विजय भी मैदान में कूद पड़ें।कहा कि अगर बोलना जूर्म है तो मैं ये जूर्म करता रहूंगा।"दिग्विजय सिंह के पास हर सवाल का जवाब है लेकिन जब पुनिया और बेनी की टकराव के बारे में पूछा गया तो कहा मीडिया वाले करा रहे हैं।जब संघ और मीडिया वाले करा रहे हैं तो पूछिए दिग्विजय सिंह से कांग्रेस में इनका क्या काम"।इस घटना के चौबीस घंटे भी नहीं हुए थे कि फर्रूखाबाद की सभा में गुमान में चूर खुर्शीद ने पसमांदा मुस्लिमों की हक दिलाने के लिए सजा भुगतने की तैयारी दिखाए तो चुनाव आयोग को बर्दाश्त नहीं हुआ।चिट्ठी लिखकर राष्ट्रपति से शिकायत कर डाली।इसके बाद देश का माहौल खुर्शीद के खिलाफ बनने लगा।"बाटलाकांड पर सोनिया भले ना रोई हों लेकिन खुर्शीद ने अपने बयान से कांग्रेस के "आंसू" जरूर निकाल दिया "।सरकार भी जानती है कि धर्म के आधार पर 9 फीसदी आरक्षण दिलाने की बात "खुर्शीद सिर के बल उलटकर कहते तो भी मु्स्लिमों को आरक्षण नहीं मिलने वाला"मु्स्लिमों के नाम पर सहानुभूति की बैंक चलाने वाली कांग्रेस की ऐसे दलीलों पर राहुल सत्ता का सपना देख रहे हैं।"खुर्शीद के "जुबानी एहसान वाले बयान" पर जब सिब्बल से पूछा गया तो अपनी पेटेंट मुस्कान के साथ "टूजी वाले चश्मे" से झांकते हुए फिर "जीरो लॉस" बताकर पल्ला झाड़ लिया"उधर,आरक्षण जैसे अमृत को पीने के लिए मु्स्लिम राहु केतु बनने को तैयार है और इधर कांग्रेस के नेता अपनी तकदीर के पहिए 360 डिग्री घुमाने के लिए तैयार हैं।लेकिन"पासवर्ड की तरह बयान बदलने में माहिर खुर्शीद के बयान से कांग्रेस के तंबू में तूफान आ गया है"।कानूनमंत्री को कानून तोड़ने की सब्सिडी देना कांग्रेस को कितना भारी पड़ेगा...6 मार्च को पता चल जाएगा।लेकिन इतना तो तय है कि "सियासी टोटकों "की दुनिया में सलमान खुर्शीद का शर्मनाक बयान एक ऐसे "अनहोनी " के तौर पर है जिसका जिक्र जब-जब आएगा सोनिया के आंसूओं का हिसाब लिया जाएगा