'मेरे पिता ने मवेशियों का चारा खाया ताकि मैं खाना खा सकूं' यह शब्द है भारतीय धावक 'गोमती मारीमुथु' के। तमिलनाडु की रहने वाली इस 'धावक' ने एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जब 'स्वर्ण पदक' जीता तब जाकर यह कहानी लोगों के सामने आयी। गोमती मारीमुथु ने ज़िंदगी में जिन विषम परिस्थितियों से जूझकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं वह उन लोगों के मुंह पर 'तमाचा' है जो सिर्फ अपनी असफलता के पीछे सुविधाओं का रोना रोते हैं। यह तमाचा उनके मुंह पर भी है जो स्वयं की प्रेरणा से कुछ करने की बजाय सोशल साइट्स पर दिन-रात सिस्टम को कोषते रहते हैं। माना कि यह हमारे सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर है लेकिन कितना अच्छा होता अगर इस तस्वीर में संवेदनाओं का रंग भरने के बजाय हम इसे संवारने में सहयोगी बनते। अपने आस-पास की इस तरह की प्रतिभाओं की अपने स्तर पर मदद करते और उनकी आवाज को स्वर देते ताकि उनका संबल बना रहे...। यकींन मानिये जिस दिन हम ऐसा करने लगेंगे उस दिन तिरंगे की शान बढ़ाने वाली किसी बेटी के बाप को चारा खाना नहीं पड़ेगा। नमन है उस पिता को जिसने इस बेटी के अंदर यह जज्बा जगाया।
Monday, April 29, 2019
Thursday, April 25, 2019
... और कांग्रेस के 'सियासी वजूद' की 'हत्या' होते होते रह गई
हम तो कांग्रेस के 'होशियारी' के कायल हो गए। पहली बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' अखिलेश प्रताप सिंह का टिकट काट कर लिया था. दूसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका चतुर्वेदी का पत्ता साफ करके लिया था। अब तीसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका वाड्रा को टिकट नहीं देकर लिया है । 'पप्पू' की टीम में कोई तो 'होशियार चमचा' है जो मोदी के 'ज्वलनशील जलवा' को ठीक से भांप चुका है। इसीलिए उसके इस निर्णय ने प्रियंका को 'कुर्बानी' से बचा लिया। वैसे भी 'अजय राय' का नाम कांग्रेस की 'औपचारिक' मजबूरी को दर्शाता है। क्योंकि ये वही अजय राय हैं जो 2014 लोकसभा चुनाम में अपनी जमानत बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आये थे। स्थानीय बनने की 'अटखेलियां' भले ही राय साहब 'खेलें' लेकिन सच्चाई यह है कि इस बार मोदी के पांच लाख वोट के मुकाबले ये एक लाख का आंकड़ा छू पाना इनके लिए मुश्किल है।
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नोट- अंदर की बात ये है कि प्रियंका भी डर गई थी कही मजाक मजाक में कही हुई मेरी बात को 'उच्च स्तरीय चरस' के नशे में पप्पू सीरियस न ले ले
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नोट- अंदर की बात ये है कि प्रियंका भी डर गई थी कही मजाक मजाक में कही हुई मेरी बात को 'उच्च स्तरीय चरस' के नशे में पप्पू सीरियस न ले ले
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