Thursday, April 25, 2019

... और कांग्रेस के 'सियासी वजूद' की 'हत्या' होते होते रह गई

हम तो कांग्रेस के 'होशियारी' के कायल हो गए। पहली बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' अखिलेश प्रताप सिंह का टिकट काट कर लिया था. दूसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका चतुर्वेदी का पत्ता साफ करके लिया था। अब तीसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका वाड्रा को टिकट नहीं देकर लिया है । 'पप्पू' की टीम में कोई तो 'होशियार चमचा' है जो मोदी के 'ज्वलनशील जलवा' को ठीक से भांप चुका है। इसीलिए उसके इस निर्णय ने प्रियंका को 'कुर्बानी' से बचा लिया। वैसे भी 'अजय राय' का नाम कांग्रेस की 'औपचारिक' मजबूरी को दर्शाता है। क्योंकि ये वही अजय राय हैं जो 2014 लोकसभा चुनाम में अपनी जमानत बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आये थे। स्थानीय बनने की 'अटखेलियां' भले ही राय साहब 'खेलें' लेकिन सच्चाई यह है कि इस बार मोदी के पांच लाख वोट के मुकाबले ये एक लाख का आंकड़ा छू पाना इनके लिए मुश्किल है।
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नोट- अंदर की बात ये है कि प्रियंका भी डर गई थी कही मजाक मजाक में कही हुई मेरी बात को 'उच्च स्तरीय चरस' के नशे में पप्पू सीरियस न ले ले


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