Monday, January 31, 2011

ना टस ना मस, ये हैं थॉमस...



बासठ साल में पहली बार किसी ने कांग्रेस से बेहयाई करने की ताकत जुटाई हैं।थॉमस के इस हिम्मत ने यूपीए सरकार की हैसियत को कुचलकर रख दिया है।कांग्रेस अपनी बेशर्मी को इस देश की अतुल्य धरोहर मानती है इसी की सुरक्षा के लिए थॉमस को चौकिदार बनाया था।लेकिन थोड़ी सी बेशर्मी थॉमस ने क्या चुरा ली तो कांग्रेस का तो जैसे बौद्धिक स्खलन हो गया।खून का घूंट पीकर रह गये कांग्रेस के नीति-नियंता।क्या करेंगे निति-नियंता जब जब कांग्रेस की विरासत शर्मनिरपेक्षता की नींव पर टिकी हो।31JAN 2011 को जब थॉमस ऑफिस पहुंचे मीडियाकर्मियों ने घेर लिया।पूछने पर थॉमस ने जवाब दिया...आई एम सीवीसी।ये तीन शब्द बोलने की हिम्मत सरकार के 48घंटे के डेटलाइन के बाद जुटाई थी।इस जुर्रत से जाहिर होता है की देश को ऐसे तिकड़मबाजों के तम्बुओं को उखाड़ फेकने में कितना बड़ा अभियान छेड़ना पड़ेगा।सरकार सच बोल रही है या थॉमस झूठ बोल रहे हैं।ये भी तय नहीं हो पा रहा है।अंधेरगर्दी में फंसा भारतीय लोकतंत्र तड़प रहा है और थॉमस जैसे लोग सतर्कता के पद के लिए सेवन रेसकोर्स में कुतर्कता का बाजार सजा रहे हैं।अब जाकर गृहमंत्री चिदम्बरम मान रहे हैं कि नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने थॉमस का विरोध किया था।लेकिन तब तो सत्ता का ऐसा गुमान चढ़ा था कि अंधे घृतराष्ट्र के चापलूसों की फौज भी अंधी हो गयी थी।इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि यूपीए सरकार की इस कायर मर्दानगी पर देश के एक जिम्मेदार नेता के मुंह से बकार नहीं निकल रहा है।चले थे युवाओं को गद्दी का ख्वाब दिखाने।इन महाशय का हम नाम गांव बताकर अभी भाव नहीं बढ़ाना चाहते हैं।राष्ट्रीय निर्माण का सपना बुना. ..तरक्की हुई कई गुना....इसी नारे पर जनता ने यकीन किया था।लेकिन विडम्बना देखिए इस भरोसे पर निगरानी के लिए जिम्मेदारी सौपीं थॉमस को ।जो ताकत और कमीनापन के दुर्लभ संयोग का नाम बन गया है।बेशक हम और आप इस पर थू-थू कर सकते हैं।लेकिन हकीकत ये है कि कांग्रेस के कौरवों की सेना का ये अगला सेनापति है।जिसके भ्रष्ट आचरण को कांग्रेस हथियार की तरह आजमाएगी।भाजपा बर्खास्त करने की मांग कर रही है और सरकार बर्दाश्त करने के लिए भांग खा रही है।आने वाली पीढ़ी जब सामान्य ज्ञान की किताबों में पीजे थॉमस जैसे लोगों का जिक्र आएगा तो समाज का फिक्र और बढ़ जाएगा।फिलहाल देश की चुनी हुई सरकार के गाल पर थॉमस के तमाचे की छाप कांग्रेस के हाथों से बड़ी है।क्या करें..बेचारे शराफत में मारे गये।

No comments:

Post a Comment