Saturday, January 29, 2011

थॉमस पर थू-थू

एक चपरासी की नौकरी पाने के लिए कानून के ना जाने कितने चाबुक झेलने पड़ते हैं।इसे आप और हम अच्छी तरह जानते हैं।लेकिन बेईमानों और निकम्मे मंत्रियों की फौज ढोने वाली देश की निठल्ली सरकार नहीं जानती।थॉमस की बेईमानी का भांडा फूटा तो सरकार सुप्रीम कोर्ट में ऐसे अनजान बन रही थी जैसे किसी नाबालिग लड़के ने बालात्कार किया हो।सतर्कता आयुक्त के पद को कलंकित करने वाले थॉमस का कद कांग्रेस में और बढ़ जाएगा।थॉमस ने राजीव गांधी के बाद गौरवशाली भ्रष्टाचार की विरासत को चमकाने की हिम्मत जो दिखाई है।दाद देनी होगी यूपीए सरकार की जो ऐसे काहिलों के भरोसे देश को तरक्की के सपने दिखा रही थी।बेईमानों को पालने का शौक कांग्रेस का पुराना शगल रहा है।तभी तो बेशर्मी की हद पार हो गयी और सरकार थॉमस को थैंक्यू कह रही है।थॉमस की नियुक्ति मनमोहन राज में बेशर्मी कानून की उड़ी हुई धज्जियों का शर्मनाक नमूना है।थॉमस की नियुक्ति एक ऐसा शर्म है जिसके बोझ से झुक गयी है सभ्य समाज की इज्जत।जिस पर आप और हम सिर्फ अफसोस कर सकते हैं और कुछ नहीं।थॉमस के लिए मनमोहन सरकार ने उन सारे कानूनों के कान उमेठ दिए जो एक चतुर्थ श्रेणी की नौकरी के लिए एड़िया रगड़ने के बाद भी नहीं मिलती।थॉमस की बेईमानी मनमोहन सरकार को इतनी लाजवाब लगी कि विपक्ष की तमाम सबूतों और गवाहों को कूड़ेदान में सजा दिया।पता नहीं अभी और कितने ऐसे थॉमस है जिनके लिए सरकार ने अपने ईमान को भ्रष्टाचार के बाजार में सरेआम नीलाम किया होगा।इस नीलामी पर संविधान की आत्मा भी थॉमस पर थू-थू कर रही होगी।कांग्रेस के विरासत पर थॉमस जैसे उचक्के की चौकिदारी पर बापू की आत्मा भी सौ बार मरी होगी।मनमोहन सरकार ये भूल गयी की वक्त का चाबुक उनसे भ्रष्टाचार का ऐसा हिसाब लेगा की भविष्य के पीजे,चीजे,लीजे जैसे रक्तबीज थॉमसों की फौज थर्रा जाएगी।थॉमस की सतर्कता में सियासी बर्बरता दिखी तो सरकार ने निर्लज्जता से 48 घंटे का नाजायज दामाद बना लिया।देश इस कमीनेपन का 48 घंटे बंधक बना रहा।देश का वाट लगाने के लिए 48 घंटे कम पड़ी तो थॉमस की निर्लज्जता फूट फूट कर बरसने लगी।कहा कि सीवीसी पद से इस्तीफा नहीं देंगे।देश की किरकिरी होती है तो हुआ करे।हम नहीं सुधरेंगे ..कर लो जो करना है।खैर..थॉमस की गुस्ताखी ने यूपीए सरकार को जो थप्पड़ मारा है उसका दर्द कांग्रेस के काले अतीत को कैंसर की तरह सड़ाती रहेगी।नवीन चावला से लेकर थॉमस जैसे लोगों की नियुक्ति के लिए भले ही विपक्षी दलों ने हो हल्ला मचाया हो लेकिन कांग्रेस तो ऐसे ही लोगों को चौकिदार बनाती है जो उसकी चोरियों पर ही मेडल दे।धिक्कार है ऐसे हुक्मरानों पर जिन्हे दबाव में आते ही दूर का दिखना बंद हो जाता है।वैसे इतिहास में अमर होने की कुछ बुनियादी शर्ते होती हैं।जो पीजे थॉमस में एक सिरे से गायब है।थॉमस भूल गये कि कद से नहीं काम से किस्मत बदलती है।


1 comment:

  1. bahut hi shaaleenta ke saath zorr ka tamacha diya hai aapne...bahut umdaa... sadhuwad ...

    ReplyDelete