गजब...गजब....दिग्विजय सिंह गजब।आप की बात कला का कोई जवाब नहीं। अपनी "फिदायीन बयान" से धमाका करने वाले दिग्विजय सिंह भारतीय राजनीति की दशा की ऐसी "दुर्दशा " की है जिसे सुधारने में अन्ना की "ईमानदारी ",रामदेव का "संस्कार " और संघ का "आदर्श " आड़े आ रहे हैं।जो सरकार आतंकवाद से बेमौत मरे लोगों के कफन को मजबूरियों की वजन से तौलने पर तुली थी...जो सरकार विध्वंस की लपटों के बीच दिल्ली के एक होटल में जलवा फरोश हसीनाओं की कमर परख रही थी




जो सरकार महंगाई पर जुबान पर मेंहदी लगाकर बैठी हो....जो सरकार कॉमनवेल्थ के कलंककथा के सूत्रधार हो....जो सरकार टूजी घोटाले पर "मन"मौजी हो...जो सरकार मनरेगा पर महालूट का हिस्सा मांग रही हो...यूपीए सरकार की इन "महान उपलब्धियों" पर नाचने के बजाय दिग्विजय सिंह "भ्रष्टाचार पर मातम" मना रहे हैं...सीना पिट रहे हैं..आपा खो रहे हैं....कांग्रेस की कब्र खोद रहे हैं।"तेजाबी जुबान से विरोधियों को बदहवाश " कर देने वाले दिग्विजय सिंह श्री श्री को भाजपा से बचने की सलाह दी है। मतलब कोई कांग्रेसी दस जनपथ जाएं और सोनिया से ना मिले। ये वही दिग्विजय सिंह है....जो सुबह कहते है राहुल से बढ़िया पीएम कोई नहीं हो सकता और शाम होते ही कहते हैं मनमोहन से ताकतवर पीएम कोई नहीं है। ये वही दिग्विजय सिंह है...जिनके मोबाइल पर मुम्बई हमले के दौरान हेमंत करकरे ने फोन किया था... ये वही दिग्विजय सिंह है...जो आजमगढ़ के संजरपुर में आतंकवादियों के घर रोजा खोलते हैं।ये वही दिग्विजय सिंह है...जिन्हे हर घटनाक्रम में कांग्रेस से ज्यादा "संघ का हाथ " मजबूत लगता है। लीबिया में गद्दाफी के आगे जी लगाने वाला पैदा नहीं हुआ ...और भारत में ओसामा को "जी" कहने वाले ..."जी का जंजाल " बन गए।अन्ना ने जब अपने ब्लॉग ने "गैंग ऑफ फोर" का जिक्र किया था तो कांग्रेसियों में खलबली मच गयी थी।नेताओं को नाम जानने की बेचैनी बढ़ गयी।चिंता सताने लगी... "अगर गैंग ऑफ फोर में शामिल नहीं हुए तो सोनिया को क्या मुंह दिखाएंगे "।जैसे पता चला लिस्ट में विशिष्ट घाघपन और कमीनेपन की क्वालिटी के आधार पर "वही चार " हैं तो मुंह पर हाथ रख लिए।नेताओं ने गैंग- ऑफ- सेकुलर में दावेदारी और स्थायी सदस्यता को ठुकरा दिए।भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना के आंदोलन को साम्प्रदायिक रंग देने में पिग्विजय सिंह लगे हैं।विवादों से घिरी टीम अन्ना से दिग्विजय सिंह ने कहा है कोर कमिटि में असली चेहरे को शामिल करे। गोविंदाचार्य,गूरूमूर्ति और अजीत डोभाल, दिग्विजय सिंह को असली मोहरे लगते हैं। पहले तो टीम अन्ना के बयानों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा था अब टीम अन्ना के सदस्यों को ही तोड़ा मरोड़ा जा रहा है।दिग्विजय सिंह का मतलब साफ है...अब गोविंदाचार्य गूरूमूर्ति और अजीत डोभाल को "प्रशांत भूषण" बनाना चाहते हैं। वो अलग बात है कि सिरफिरे हमलावरों को किसी ने दिग्विजय सिंह की जगह प्रशांत भूषण का गलत ठिकाना बता दिया। (जारी है)



