Sunday, January 13, 2013

बेशर्म यूपी सरकार का "समाजवाद" देखिए


मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान शहीद को सैल्यूट करने पहुंचे थे....जमीन पर बैठे...बिना किसी फऱमाइश के फर्ज को अदा किया।शालीनता के साथ....अनुशासन के साथ....संवेदना के साथ....सहभागिता के साथ एक मां के दर्द को शिद्दत से महसूस किए।.लेकिन यूपी में सीएम अखिलेश यादव के पास ना तो फुर्सत थी और ना ही उनके मंत्रियों के पास।पता नहीं कौन सा जरूरी काम निपटा रहे थे उनके मंत्री ...कि उन्हें "मथुरा जाने में उनकी आत्मा धिक्कार रही थी"।किसी मंत्री ने मथुरा के शेरनगर जाने की हिम्मत नहीं दिखायी।"अच्छा हुआ शेरनगर की सरजमीं पर नामर्दों का पैर नहीं पड़ा"।सैफई महोत्सव में "हसीनाओं के ठुमकों पर लड़खड़ाकर यूपी पर एहसान करने वाले मंत्री सपाराज में "अंधेरगर्दी की आकाशगंगा के ध्रुवतारा" बन गए हैं"कन्याविद्या धन..बेरोजगारी भत्ता देने के लिए भव्य मंच पर लाव लश्कर के साथ चढ़ाई करने वाले मंत्री इतने बेहोश हैं कि पूछने पर जुबानी कटार चला रहा है।9जनवरी 2013 की रात को हुए शहीद के अंतिम संस्कार के अगले दिन 10 जनवरी 2013नागरिक सुरक्षा और स्टाम्प मंत्री दुर्गा यादव कन्याविद्या धन बांटने पहुंचे थे।डीएम एसपी की सलामी...आगे पीछे काफिला...गाड़ी पर हूटर...और "गाड़ी के आगे-आगे चल रही समाजवाद की खोखली गुमान " पर सवार दुर्गा यादव कन्याविद्या धन बांटने के बाद जब कैमरे के चमकते फ्लैश से सामना हुआ तो दुर्गा यादव ने कहा कि मुझे तो कूछ पता नहीं है... जैसे मंत्री को पता होता तो कयामत कर देते।"इस फिदायीन जुबान से सुनने वालों को सुलगा दिया ...सीधे सीधे थर्ड डिग्री टार्चर....धधकते गुस्से की गाल पर तमाचा मारकर समाजवाद के सरोकारों की अंत्येष्टि कर दी"" पूछिए इस मंत्री से सैफई में कितने ठुमके लगे....पूछिए कमर की लोच को परखने वाले समाजवाद के ऐसे "वैज्ञानिकों " से...जुल्फों की पेंचोंखम में "समाजवाद की सजावट को"....पूछिए अल्पसंख्यकों के रहनुमाओं से....हसीनाओं की बलखाती चाल को .... "जेपी और लोहिया की यादों के अवशेष से साइकिल को खड़ा करने वाले शर्म करो उस शक्तिबोध जो तुम्हे जालिम बना रही है""शर्म करो उस अंतरात्मा पर जो बहाने खोज रही है""शर्म करो उस नियति पर जो निकम्मी बना रही है"।लानत है समाजवाद के ऐसे बेशर्म "शिल्पकारों " पर...क्या सुन नहीं है अखिलेश सरकार ""शहीद हेमराज का परिवार सम्मान के लिए भूख हड़ताल पर बैठा है और समाजवादी सल्तनत के सूबेदार अखिलेश यादव घूम घूम कर सम्मान करवा रहे हैं""कह रहे हैं बीस लाख का चेक तैयार है बस मौका मिलते ही "एहसान चुका दूंगा "।अब आपको पूरे वाकये के पीछे की खबर बताते हैं।जम्मू-कश्मीर में आठ जनवरी 2013 को पाकिस्तानी सेना ने पूंछ सेक्टर के मेंढ़र के पास दो भारतीय जवानों की दरिंदगी से हत्या कर दी।और हत्या के बाद जवानों के सिर भी काटकर ले गए।खबर मिलते ही हिन्दुस्तान में गुस्सा फूट पडा।सबसे पहले गृहमंत्री शिंद बार निकले ।कहा,कि 26/11का मोस्ट वांटेड हाफिज सईद सीमा पर चार दिन पहले देखा गया था।देखा गया और शिंदे साहब को भी दिखा गया।शिंदे साहब के इस खुफिया सूचना पर देश ने माथा पिट लिया।
"अब तो सबक सिखाना पड़ेगा।पाकिस्तान से गिड़गिड़ाने की नहीं गला पकड़ कर दबाने वाली बात हो ...और करो....अमन की आशा ....और दो मियांदादों को वीजा ....और खेलो मैच .....और करो क्रिकेट डिप्लोमेसी...और करो रहमान मलिक की मेहमानवाजी ....और करो युद्दविराम ....और कराओ जियारत ....शर्म के अगर पंख होते तो कबका उड़ जाता।लेकिन संसद में उसके एक -एक सांस को सींचने वाले अभी भी मौजूद हैं....पाकिस्तान के घर में घुस कर मारने की बजाय ...विरोध दर्ज कराएंगे ....डोजियरबाजी करेंगे ....अमेरिका को बताएंगे ...पाकिस्तान से बात करेंगे ....सब करेंगे लेकिन पाकिस्तानी सैनिकों की जान नहीं लेंगे ।"डोजियर .....फाइल ...दौरा ...सबूत ...पुख्ता सबूत ...विदेशमंत्री ...ना जाने कबतक दलीलों की दलदल में भारत का संयम का दम घुटता रहेगा।