
खून खौल उठेगा..उस तारीफ को सुनते तो।भ्रष्टाचार की दुर्लभ ऊंचाईयों पर ले जाने वाले राजा पर परम आदरणीय मनमोहन सिंह को नाज था।खबरदार,जो राजा पर कोई तोहमत लगाया...ब्ला ब्ला ब्ला।राजा के प्रति किसी वजीर की वफादारी का भारतीय लोकतंत्र में ये पहला चैप्टर है।आप को पता है राजा पीएम के दुलारे क्यों थे।क्योंकि
1.एलायंस के औलाद हैं।
2.यूपीए सरकार की जो योजनाएं बेचारे दलालों तक नहीं पहुंच पाती थी उसे राजा पहुंचाते थे।
3.काग्रेस के भड़ुओं पर से विश्वास उठ गया था।
4.दलाल प्रकोष्ठ संभालने में महारत।
5.लाइसेंस और पूछ पूछ...... देते थे।
और भी कई ऐसी खूबियां जो ए राजा की गुस्ताखी में शुमार थी।जिसे राजा ने सरकारी अकड़ की हार्डवेयर से जोड़कर देश के खजाने की वाट लगायी।सीएजी के मुताबिक टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला करीब 1.77 लाख करोड़ रूपये का है।जिस पर जांच के लिए विपक्षी दलों ने जेपीसी की मांग की।लेकिन सरकार तो राजा की नादानी पर ऐसे गुर्रा रही थी जैस परछाईं देखकर कुत्ता गुर्राता है।राजा का हिसाब किताब सुनेंगे तो खून खौल उठेगा।राजा को जब मीडियाकर्मी ने घेरा थे तो अपनी करतूतों को नियमों के मुताबिक कहा कि पहले से जो नियम चली आ रही है उसी हिसाब से खजाने को चूना लगाया है।राजा की नादानी सीबीआई की आंखो की किरकिरी बन गयी। सीबीआई की तथाकथित चौबीस कैरेट की ईमानदारी , सरकारी बेईमानी के ट्रेडमार्क पर भारी पड़ गयी।जिस दामाद सीबीआई को कांग्रेस ने दुरूपयोग का लाइसेंस दिया था आज उसी सीबीआई ने राजा का घराना छिन लिया।पर सवाल ये है कि असली राजदार राडिया,बैजल और चंदोलिया जैसे बहेलिया की बेहयाई की बेकद्री क्यों हो रही है।ऐसे ही कुछ सवाल ऐसे है जो सीबीआई की सक्रियता पर सवाल उठाते हैं।
1.राजा की गिरफ्तारी करूणानिधि और सोनिया मुलाकात के बाद क्यों हुई ?
2.राजा को गिरफ्तार करने के लिए क्या सीबीआई को हरी झंडी मिली थी ?
3.क्या राजा की गिरफ्तारी का सियासी लाभ सिर्फ कांग्रेस को मिलेगा ?
4.बजट सत्र के लिए राजा कहीं सियासी शिकार तो नहीं हो गये ?
ऐसे बहुत से सवाल है जिससे कर भला तो हो बुरा टाइप का जवाब मिलेगा।खैर राजा को कैद मिलना था मिला।लेकिन खजाने को लगने वाला चूना का भरपाई कैसे होगा।इस चिंता से ज्यादा जरूरी ये है कि कैसे जाएगी राजा की हेकड़ी।इसके लिए कितना रगड़ना पड़ेगा।गैर कांग्रेसी दलों को पानी पी पीकर गरियाने वाले कांग्रेस की चक्की के रोटी खाने वालों.... राजा की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही जुबान जीरो साइज की क्यों हो गयी।तब तो राजा के लिए हनकदार बातें निकलती थी।अब बकार क्यों नहीं निकल रहा है।तब तो जुबान कटार बन गयी थी।अब सिट्टी पिट्टी गुम क्यों हो गयी।गीदड़ की मौत आती है तो शहर की ओर भागता है औऱ किसी मंत्री की सियासी मौत आती है तो सेवन रेसकोर्स की ओर भागता है।धिक्कार है यूपीए सरकार पर।जिसने गठबंधन धर्म के लिए देश की सम्प्रभुता की बोली लगा दी।पता नहीं किस गुनाम में कांग्रेस अपने अतीत के बोझ को सीने से चिपका कर रखती है।परिवारवाद जमात की कांग्रेस को जब आन्ध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी छाप कांग्रेस की आंच में झुलसते देखा तो सियासत की इस नयी वंशबेल को उखाड़ फेंका।सोनिया छाप तानाशाही रवैये को सींचने के लिए चापलूस कम पड़ गये तो दुर्भावनाओं से ग्रस्त दिग्विजय छाप दुर्योधनों को लाइसेंस दे दिया।सत्ता का मोह ऐसा लगा है कि पराजय के दौर में पाँखड से पीछा छुड़ाने का जी नहीं कर रहा है।परिवारवाद की विध्वंसक अवशेष में एक राजा अपने अभिमान का बीज ढूढ़ रहा था लेकिन उसे ये नहीं पता था कि जिसे वो अभिमान समझ रहा है वो एक मुगालता था।अब ना सत्ता का राज रहा और ना ही पार्टी का सिर पर ताज।
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