आमदनी बढ़ी है इसलिए महंगाई बढ़ी है।और आमदनी बढ़ी है सरकारी योजनाओं से।पीएम का ये बयान सुनकर आप के तन बदन में आग लग गया होगा।अब आगे सुनिए.....गरीब लोग सरकारी योजनाओं के पैसे से चिकन,अंडा,दूध पी रहे हैं...इसलिए महंगाई बढी है।पीएम के इस बयान ने सरकारी भरोसे के चिथड़े उड़ा दिए।बयानों की बर्छी से गरीब जनता को ऐसा हलाल किया है कि गरीबी भी शर्मिन्दा है।गरीब जनता प्याज नहीं देख पा रही और निकम्मे नेता प्या
ज पर राजनीतिक ब्याज जोड़ रहे हैं।सुन लो भाइयों...आज से अभी से अपने किस्मत पर भरोसा करना शुरू कर दो....इन निकम्मे नेताओं के भरोसे तो एक कप चाय मिलने से रही....भरपेट खाना तो दूर की बात है।जनता मरी जा रही है और सरकार महंगाई पर जश्न मना रही है।तोते से पूछो,टैरो कार्ड वाले से पूछो.तांत्रिक से पूछो,भिखारी से पूछो,लेकिन इस देश की सरका से मत पूछो।महंगाई कब कम होगी।प्रणव बाबू कह रहे है हमारे पास कोई जादुई चिराग नहीं है।आप के पास नहीं है तो किसके पास है प्रणव बाबू।नारा दिया था..आम आदमी के बढ़ते कदम....हर कदम पर भारत बुलंद।आ
दर्श राजा का भ्रष्टाचार कम पड़ी तो यूपीए सरकार महंगाई से भारत
बुलंद कर रही है।कुछ महिना पहले ही एफसीआई की निकम्मी फौज को ढ़ोने वाली कृषि मंत्रालय की लापरवाही से लाखों टन गेहू सड़ गया।गेहूं से ब
दबू आने लगी।इस बेकद्री पर तो जानवरों की दीवाली मन गयी।क्या जरूरत है चरने की।स्टेशनों पर तो चोकर की जगह गेहूं जो मिल गया।बदइंतजामी की हद हो गयी और पवार साहब कह रहे है जगह कि कमी नहीं होगी।गेहूं सड़ाकर बंटाधारी निकम्मे अफसर अपनी काहिलियत निखार रहे थे।लेकिन पवार को रत्ती भर शर्म नहीं आयी।जैसे सड़ा गेहूं खाकर जी गए तो क्या... मर गए तो क्या।सुप्रीम कोर्ट से जब अर्थ का ये अनर्थशास्त्र नहीं देखा गया तो सरकार को हेकड़ी ढ़ीली की।सरकार ने इसका गु्स्सा निकाला जनता पर।खार खायी सरकार ने कहा जनता ज्यादा खा रही है इसलिए मंहगाई बढ़ रही है।ऊपर से लुटियन्स के टीले पर बैठे कल्याणकारी अवधारणा,सियासी चेतना की चिंता करने वाले जरा ढपोरशंखियों की बर्बरता देखिए।आमदनी बढ़ेगी तो.... महंगाई बढ़ेगी।पीएम कह रहे हैं...हम क्या करें।वित्तमंत्री कह रहे हैं....हम क्य़ा करें।पवार साहब कह रहे हैं...हम क्या करें।कुछ मत करिए अपने कायर मर्दानगी पर ताली बजाइए।मौज करिए।मन ठीक हो तो भजन कीर्तन करिए।बाकी तो आप से तो कुछ होने वाला नहीं।देसी महंगाई के आगे पीएम की कैम्ब्रिजीआ
ई इकॉनॉमिक्स गयी तेल लेने।बुजदिल पीएम इस अंधेरगर्दी को अपने पोथी में रामराज लिखते हैं।शर्म करो उस शक्तिबोध को जो गरीबो का हक मारने के लिए जालिम बना रहा है।जान लिजिए..अब प्रधानमंत्री भी उसी लाइन में आ गए हैं।सुन लो....आमदनी किसकी बढ़ी है।एयर कंडीशन में बैठकर मुफ्त का चिकन,मुर्ग मुसल्लम,कबाब,मछली,विरयानी उड़ाने वालों ये क्यों नहीं कहते अपने हाथों में आयी कलम जरा ज्यादा घूम गयी।श्रीमानों का वेतन जोड़ घटाके एक लाख बाइस हजार तक पहुंच गया है।और सरकार कह रही हैं गरीब जनता की आमदनी बढ़ी है।हमको लालीपाप थमाकर खजाने की चाभी घुमा दी।बस करिए आप का एहसान सहा नहीं जा रहा है।दाल मिल गयी तो तड़का लगाने में हैसिय़त पर आंच आने लगता है।सब्जी मिल गयी तो तेल भाव खा रहा है।दूध मिल गया तो चीनी चिल्ला रही है।प्याज देख लिया तो इनकमटैक्स का छापा पड़ जा रहा है।देश के गरीबों का चैन सूकून बाजार में गिरवी रखकर दिया।और सरकार कह रही है ..पेट्रोल, डीजल और किरोसीन का भाव जानने के लिए अरब देशों का अखबार पढ़िए।पता नहीं यूपीए सरकार के मंत्री कौन सा हिसाब पढ़े हैं।चीनी की कीमत तिगुनी हो गयी सरकार कहती है...चीनी मत खाओ।दाल की कीमत तिगुनी हो गयी सरकार कह रही है....मूंग की दाल खाओ।पेट्रोल की कीमत दोगुनी हो गयी सरकार कहती है...गाड़ी मत चलाओ।जिस देश की आबादी को दो वक्त की रोटी नही मिलता उनके बारे में सोच लेते तो आप का गुमान नहीं चुभता।हम तो जैसे तैसे जी लेंगे..जी ही रहे हैं।लेकिन ये मत भूलिए कि आवाम के तर्के विश्वास की आंधी में हुकूमतों के हवामहल तिनके की तरह उड़ जाती है।(जारी है...)
Saturday, February 5, 2011
मंहगाई @ कायर मर्दानगी
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भ्रष्टाचार,
महंगाई,
राजनीति
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