Monday, April 29, 2019

गोमती मारीमुथु पर देश को गर्व है

'मेरे पिता ने मवेशियों का चारा खाया ताकि मैं खाना खा सकूं' यह शब्द है भारतीय धावक 'गोमती मारीमुथु' के। तमिलनाडु की रहने वाली इस 'धावक' ने एशियाई एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जब 'स्वर्ण पदक' जीता तब जाकर यह कहानी लोगों के सामने आयी। गोमती मारीमुथु ने ज़िंदगी में जिन विषम परिस्थितियों से जूझकर सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं वह उन लोगों के मुंह पर 'तमाचा' है जो सिर्फ अपनी असफलता के पीछे सुविधाओं का रोना रोते हैं। यह तमाचा उनके मुंह पर भी है जो स्वयं की प्रेरणा से कुछ करने की बजाय सोशल साइट्स पर दिन-रात सिस्टम को कोषते रहते हैं। माना कि यह हमारे सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर है लेकिन कितना अच्छा होता अगर इस तस्वीर में संवेदनाओं का रंग भरने के बजाय हम इसे संवारने में सहयोगी बनते। अपने आस-पास की इस तरह की प्रतिभाओं की अपने स्तर पर मदद करते और उनकी आवाज को स्वर देते ताकि उनका संबल बना रहे...। यकींन मानिये जिस दिन हम ऐसा करने लगेंगे उस दिन तिरंगे की शान बढ़ाने वाली किसी बेटी के बाप को चारा खाना नहीं पड़ेगा। नमन है उस पिता को जिसने इस बेटी के अंदर यह जज्बा जगाया।

Thursday, April 25, 2019

... और कांग्रेस के 'सियासी वजूद' की 'हत्या' होते होते रह गई

हम तो कांग्रेस के 'होशियारी' के कायल हो गए। पहली बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' अखिलेश प्रताप सिंह का टिकट काट कर लिया था. दूसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका चतुर्वेदी का पत्ता साफ करके लिया था। अब तीसरी बार कांग्रेस ने 'सही निर्णय' प्रियंका वाड्रा को टिकट नहीं देकर लिया है । 'पप्पू' की टीम में कोई तो 'होशियार चमचा' है जो मोदी के 'ज्वलनशील जलवा' को ठीक से भांप चुका है। इसीलिए उसके इस निर्णय ने प्रियंका को 'कुर्बानी' से बचा लिया। वैसे भी 'अजय राय' का नाम कांग्रेस की 'औपचारिक' मजबूरी को दर्शाता है। क्योंकि ये वही अजय राय हैं जो 2014 लोकसभा चुनाम में अपनी जमानत बचाने के लिए संघर्ष करते नजर आये थे। स्थानीय बनने की 'अटखेलियां' भले ही राय साहब 'खेलें' लेकिन सच्चाई यह है कि इस बार मोदी के पांच लाख वोट के मुकाबले ये एक लाख का आंकड़ा छू पाना इनके लिए मुश्किल है।
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नोट- अंदर की बात ये है कि प्रियंका भी डर गई थी कही मजाक मजाक में कही हुई मेरी बात को 'उच्च स्तरीय चरस' के नशे में पप्पू सीरियस न ले ले


Monday, March 18, 2019

जब बढ़ गया 'पद्मश्री' सम्मान का मान

इ जो मोदी जी हैं न एकदम से 'पगला' गये हैं। न जाने किसको-किसको 'पुरस्कार' पकड़ावाए जा रहे हैं... बताओ भला कउनो 'नेता' ऐसा करता है। चुनाव 'कपार' पर है, कल को कुछ 'आफत-विपत' आ जाए या 'ऊंच-नीच' पड़ जाय तो 'पुरस्कार वापसी' के लिए कहां खोजेंगे इनको। लिख के ले लो... इ जेतना लोग 'नंगा पैर' और हवाई 'चप्पल' पहिन के पुरस्कार लेवै पहुंचे हैं 'एक्को' नहीं दिखेंगे। अरे दस-बीस 'भोकाली' टाइप क 'बुद्धिजीवी' लोगन को अगर इ 'पुरस्कार' दे दिये होते तो का 'बिगड़' जाता। कम से कम 'मौका' पड़ने पे इ सब 'गिरोह' बना के पुरस्कार त 'लउटा' देते। अउर त अउर ऐसन 'अदमिन' के पुरस्कार दिये हैं कि कउनों 'मीडिया' वाले भी यह सबन के ना पहिचनतैं.. । सही में इ मोदी जी भी एकदम से 'बुरबकै' हउऐं, पांच साल 'बिताय' लेहनै लेकिन पहिले क सरकार से 'एक्को रत्ती' भी ना सिख पउनै... ।


Tuesday, February 5, 2019

भ्रष्टाचार की कवच क्यों बनी ममता...?

शारदा चिट फंड घोटाले की जांच करने कोलकाता पहुंची सीबीआई तो ममता के इशारे पर सीबीआई के अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जाता है। सीबीआई पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करना चाहती है लेकिन ममत बनर्जी खुद ढाल बन जाती हैं और 3 फरवरी को रात 8 बजे धरने पर बैठ जाती हैं। रात होते होते ये ड्रामा 

मोदी बनाम ममता में तब्दील हो जाता है। 
ममता   मोदी से इतनी नफरत है कि उन्हें 2019 में जीतते नहीं देखना चाहती हैं।पुलिस कमिश्नर शारदा और रोजवैली चिटफंड के जरिये किये गए घोटाले की जांच कर रही SIT के प्रमुख थे। उस समय आपने जो सबूत इकट्ठा किये थे उसमें से अपनी बॉस ममता को बचाने के लिए आपने उन सबूतों में से बहुत से सबूत डिलीट कर दिए। अब सवाल यही उठता है कि पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के पास शारदा चिट फंड घोटाले का कौन से सबूत थे जिसे वो मिटा दिए । इस लड़ाई में

ममता वो हर काम कर रही है जिससे उनका पतन सुनिश्चित है।पता नहीं किस जिद में लोकतंत्र की मर्यादा और संवैधानिक तंत्रों पर अपनी हुकूमत का हंटर चला रही हैं। बंगाल के लोग देख रहे हैं और समझ भी रहे हैं। आने वाला वक्त TMC के लिए अभिशाप होगा। भाजपा के जिन कार्यकर्ताओं ने बंगाल में बलिदान दिया है वो व्यर्थ नहीं जाएगा।दमन के खिलाफ कार्यकर्ता जान हथेली पर लेकर जंग लड़ रहे हैं।बंगाल में सुशासन के लिए हर चुनौती का डटकर सामना कर रहे हैं।वर्षों से लात, घूंसा, लाठी, गोली खाने वाले कार्यकर्ताओं की आहट से ममता की नींद उड़ गई है। 

Tuesday, January 15, 2019

देश को 'देशद्रोह में पीएचडी' करने वालों से आजादी कब मिलेगी ?


NDTV पर
मोन्टाज खत्म होते ही....
बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ (ढिंचक..ढिंचक...ढिंचक)
रोजाना की तरह टीवी स्क्रीन पर ज्वलनशील मुस्कान के साथ 'अवतरित' होते ही मुंह खुलता है।
नमस्कार...। मैं र... विष कुमार 
अभिव्यक्ति की इतनी बड़ी सजा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में मिल रही है और आप गाय, गीता और मंदिर के मसले पर उलझे हैं। क्या हो रहा है समाज में ? मोदी सरकार आखिर क्यों इन बेगुनाहों के पीछे हाथ धोकर पड़ी है। क्या वो भगवा एजेंडे पर काम कर रही है। अगर ऐसा नहीं है तो बिहार के गरीब तबके से आये 'कन्हैया कुमार' के खिलाफ पिछले 3 साल में जो सरकार सबूत तक नहीं जुटा पाई उसी 'कन्हैया कुमार' के खिलाफ 1200 पन्ने का चार्जशीट कैसे 'दाय'र कर दिया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस साजिश का शिकार सिर्फ 'गरीब' कन्हैया ही नहीं है उसकी 'संगीत मंडली' में 'ढपली' बजाकर 'जीवन यापन' करने वाले 'उमर खालीद' और मेहनत मजदूरी कर लुटियन की दिल्ली में शिक्षा लेने आये 'अनिर्बान भट्टाचार्य' जैसे एक नहीं, दो नहीं पूरे दस सीधे-साधे 'बुजुर्ग' विद्यार्थी हुए हैं। क्या इस देश में अब 'आजादी' की बात करना गुनाह है। क्या इस देश में अब कोई 'नारे' भी नहीं लगा सकता है। क्या किसी 'भटके' हुए व्यक्ति के फांसी' के खिलाफ आवाज भी नहीं 'बुलंद' कर सकता। आपका 'दम 'घुटे या न घुटे इस सरकार में कई लोगों के 'दम' घुट रहे हैं। यहां की फिजाओं में जहर की खेती हो रही है। अघोषित आपातकाल की स्थिति से यह देश गुजर रहा है। आज कन्हैया कुमार और उनके मासूम मित्र इस सरकार के शिकार हुए हैं कल आप भी हो सकते हैं। इसमें पूरी गलती मोदी सरकार की है, 3 साल तक कन्हैया कुमार के खिलाफ कुछ नहीं कर पाई अब चुनाव आते ही चार्जशीट दायर कर रही है। आप समझते हैं दिल्ली पुलिस बहुत चुस्त है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। नागपुर से आदेश आने के बाद ही कन्हैया कुमार का नाम चार्जशीट में दायर किया गया। मोदी जी आखिर कैसा देश बनाना चाहते हैं। भाजपा वाले कह रहे हैं....लेकिन उनके कोई प्रवक्ता हमारे टीवी पर आने को तैयार नहीं है ..ब्लां....ब्लां...ब्लां।
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नोट- अब 'बवासीर कुमार' को कौन समझाए। इस मुद्दे पर जैसे NDTV 'अपना काम' कर रही थी वैसे ही दिल्ली पुलिस 'अपना काम' कर रही है

Saturday, January 12, 2019

इसे ही कहते हैं...लव जिहाद

लव जिहाद' को कोरी कल्पना कहने वालों इस 'खबर' को जरा ध्यान से पढ़ लो। 'आसमानी किताब' की आयतों को मानने वाले इन डरी हुई कौमों के 'शांतिदूतों' की हरकत और हिमाकत तो देखिए। पहले लड़की को एडिट फोटो से 'ब्लैकमेल' किया फिर 'गोमांस' खाने व 'नमाज' पढ़ने का दबाव बनाया और जब इससे भी मन नहीं भरा तो दुबई 'बेचने' की पूरी तैयारी कर ली। यह मामला 'बाड़मेर' का है। जम्मू कश्मीर का रहने वाले एक शांतिदूत 'गुलजार' ने इस काम को अंजाम दिया। शुक्र है लड़की किसी तरह वहां से बचकर अपने घर पहुंच गयी। खैर हमको क्या हम तो अभी सेक्युलरिज्म का पट्टा डाले 'हामिदों' और 'नसीरों' के बयान का 'समर्थन' करने में लगे हैं। इस मसले पर फिर कभी सोचा जाएगा।

Thursday, December 20, 2018

नसीहरुद्दीन साहब....आप एक्टिंग कम 'ड्रामा' अधिक करते हैं

मेरा भारत महान है...सुषमा मैडम आप महान हैं....। ये 'अल्फाज' उस मां के हैं जिसका बेटा छह साल बाद 'पाकिस्तान' से वापस अपने 'वतन' लौटा है। 'हामिद' की मां 'फौजिया' की पथराई आंखों से 'टपक' रहे ममता के आंसूओं में घुले यह 'अल्फाज' शायद 'नसीरुद्दीन शाह' साहब के कानों को नहीं सुनाई दिया तभी तो बोल रहे हैं कि उनको 'भारत' में रहने पर 'डर' लग रहा है। 2019 के पहले 'असहिष्णुता गैंग' की तरफ से पहला 'प्रायोजित बयान' आ चुका है देखते हैं अगला नाम इस 'गैंग' में किसका जुड़ता है।
वैसे एक सलाह है, आप माउन्टेन ड्यू पिया करिए... क्योंकि डर के आगे जीत है।