इ जो मोदी जी हैं न एकदम से 'पगला' गये हैं। न जाने किसको-किसको 'पुरस्कार' पकड़ावाए जा रहे हैं... बताओ भला कउनो 'नेता' ऐसा करता है। चुनाव 'कपार' पर है, कल को कुछ 'आफत-विपत' आ जाए या 'ऊंच-नीच' पड़ जाय तो 'पुरस्कार वापसी' के लिए कहां खोजेंगे इनको। लिख के ले लो... इ जेतना लोग 'नंगा पैर' और हवाई 'चप्पल' पहिन के पुरस्कार लेवै पहुंचे हैं 'एक्को' नहीं दिखेंगे। अरे दस-बीस 'भोकाली' टाइप क 'बुद्धिजीवी' लोगन को अगर इ 'पुरस्कार' दे दिये होते तो का 'बिगड़' जाता। कम से कम 'मौका' पड़ने पे इ सब 'गिरोह' बना के पुरस्कार त 'लउटा' देते। अउर त अउर ऐसन 'अदमिन' के पुरस्कार दिये हैं कि कउनों 'मीडिया' वाले भी यह सबन के ना पहिचनतैं.. । सही में इ मोदी जी भी एकदम से 'बुरबकै' हउऐं, पांच साल 'बिताय' लेहनै लेकिन पहिले क सरकार से 'एक्को रत्ती' भी ना सिख पउनै... ।

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