सबसे पहले बता दें कि ये पोस्ट(मार्टम)सिर्फ उनके लिए है जिन्होंने राम "लीला " में कांग्रेस से "मसाज " कराया।उनके लिए है जिन्होंने लाठी की धुन पर मुट्ठासन किया।इस पोस्ट के सारे किरदार असली है और ये पोस्ट किसी काल्पनिक घटना पर नहीं "सरकार के लिजलिजेपन" पर आधारित है।सबसे पहले आप को फ्लैशबैक में ले चलते हैं।








तीन जून को सरकार के चार महाठग(चार कद्दावर मंत्री प्रणय बाबू,अबोधकांत सहाय,कुटिल सिब्बल और पौन बंसल) दिल्ली एयरपोर्ट पर एक ठग(बाबा रामदेव) को रिसीव करने पहुंचे थे। रामदेव को सत्याग्रह करने से रोकने के लिए कई एक्सपेरिमेंट किए।लेकिन सारे लिटमस टेस्ट फेल हो गए।













अगले दिन यानी चार जून को दिन में सत्याग्रह चल रहा था।मंच पर "मेहरबानों "ने मोर्चा संभाल रखा था।नारे और गाली के बीच सरकार का(को)उखाड़ने के लिए "विशेषज्ञों की टीम " जुबान को कटार बना रही थी।दोपहर बीता,शाम हुई।घड़ी में तकरीबन 6.50 बज रहे थे।तभी बाबा रामदेव ने ऐलान किया कि सरकार ने सभी मांगों पर सहमति जता दी है लेकिन अनशन तबतक जारी रहेगा जबतक कि सरकार से लिखित भरोसा ना मिल जाए।इधर बाबा ने ऐलान किया उधर सिब्बल ने "सिलैबस " आउट कर दिया।मांग पूरा होने से पहले ही "निष्कर्ष " सामने देख बाबा की धिग्धी बंध गयी। बाबा के चेहरे पर झल्लाहट और भौचक्केपन के भाव से “ समझदारी " उजागर होते ही भरोसे की दीवार में सेंध लग गयी। सत्याग्रह की "राम " कहानी का द इंड होने से पहले ही पुलिस ने "लट्ठासन से सत्याग्रबाजों की सेहत को दुरूस्त करना शुरू कर दिया"।दिल्ली पुलिस के वीरबहादुरों ने "रात में ही अनुलोम विलोम " करा डाला।सत्याग्रहबाजों की सेवा में "सदैव की तरह पुलिस तत्पर दिखी "।वीरबहादुर, खड़े टारगेट को ठोकते रहे और बाबा के अंधभक्त शराफत में मार खाते गए।धुप्प अंधेरे में पंडाल में आग लगा दी गयी।पंडाल को लाक्षागृह बनते देख बाबा भी "कूदासन कर अन्तर्ध्यान हो गए "।बाबा रणछोड़दास के अंतर्ध्यान होते ही कोहराम मच गया।"सरफरोसी की तमन्ना " छाप गाने वालों को जब पुलिस पकड़ने आयी तो सारी सरफरोसी ....जिस्मफरोशी में बदल गयी।खास बात ये है कि दिल्ली पुलिस के हाथों मार खाने वालों को नरक में कम मार पड़ती है।ये यमराज का कोई एडवांड स्कीम नहीं बल्कि मौत पर मिली तत्काल छूट थी।सिब्बल के सिलैबस के एक पन्ने ने आधी रात को"आपातकाल "लगा दिया।बेचैन उम्मीदों का सूरज निकले उससे पहले बाबा की मर्दानगी ने धोखा दे दिया लिहाजा आठ घंटे तक दिल्ली पुलिस के "आध्यात्मिक दामाद" बने रहे।" कानून का कांडोम " पहनकर "सत्याग्रह का बालात्कार " करने वाले "हुक्मरान " ऐसे अनजान बन रहे हैं जैसे वो अभी नाबालिग हों।उधर,हरिद्वार में सफेद सूट सलवार में बाब रणछोड़ दास सामने आते है तो इधर,दिल्ली में राजनीति के प्रेम चोपड़ा दिग्विजय सिंह ।दिग्विजय सिंह ने 5 जून की सुबह बाबा को ठग बताया,फिर उसी दिन मुरादाबाद में सोनिया गांधी के त्याग से शठ योगी के औकात की तुलना कर बैठे। शाम होते होते कांग्रेस के कलंदरों में सफाई देने की लाइन लग गयी।पुलिस के "सराहनीय कार्य" पर जुबानी तमगा पहनाने की होड़ मच गयी।इसी नेक काम का ईनाम जर्नादन द्विवेदी को जूते से मिला ।कांग्रेस पर जूता चलाकर राजस्थान के सुनील कुमार ने पूरी महफिल लूट ली और भाजपा देखती रह गयी ।3 जून को ही दिग्विजय सिंह ने कहा था रामदेव के अनशन से सरकार घबराती तो रामदेव को जेल में डाल देती।आपात काल को दौर में भी कांग्रेस ने यही किया था।जिससे डर लगा उसे जेल में ठूंस दिया।खैर इस "सुदंरकांड " के बाद बाबा रणछोड़ दास तो अब जान ही गए होंगे की फिल्मी गीतों पर एक्टिंग करना और हकीकत में देश के लिए जान की बाजी लगाने में कितना फर्क हैं ।इस फर्क से अनजान "अमूल बेबी" की "किलकारी" पर पूरे देश की निगाहें थी।भट्टा पारसौल में " अमूल बेबी का बालकांड " की याद जो ताजा हो गयी।भट्टा पारसौल में अमूल बेबी करे तो रासलीला ….....रामदेव करें तो कैरेक्टर ढीला ।सुन लिजिए.....जिस दिन काले धन के पहाड़ पर बैठे शुक्राचार्यों खुलासा होगा।उसदिन सरकार की थकी हुई शब्दावली जनता के खौलते जज्बातों के आगे दीवार बनने से इनकार कर देगी।


विजय भाई ........सरकार का रुख चाहे जितना भी कड़ा हो लेकिन रामलीला मैदान व राजघाट पर रामदेव बाबा और अन्ना हजारे के सत्य के आग्रह पर उमड़ी भीड़ ने जाता दिया की जनता अब भ्रष्टाचार को अब और सहन नहीं कर सकती। सरकार के आँखों के दिए से रोशनी का तेल ख़त्म हो गया है इसलिए वह तूफान आने से पहले की ख़ामोशी को नहीं समझ रही है।
ReplyDeleteएक तरफ रामदेव दूसरी तरफ रोम की देवी। अब आपको टी करना है की आप ऊँ के साथ है या रोम के साथ.......
अगर भारत में शांति से रहना है तो कांग्रेसी बन जाओ या जेल जाने के लिए तैयार रहो मित्रों..........
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