कामयाबी पचाना सबके बूते की बात नहीं होती।कामयाबी इंसान को महान बनाती है।बहुत ज्यादा दिन नहीं हुआ जब राजस्थान के एक जिले में एक डीएम का ट्रांन्सफर किया गया...तो डीएम के ट्रांसफर को रूकवाने के लिए वहां कि जनता सड़कों पर उतर आयी।इस डीएम ने कुर्सी पर नहीं दिलों पर राज किया था।इस नौकरशाह के प्रति जनता ने हमदर्दी का हिमालय खड़ा कर दिया।लेकिन सियासी आग को इसे पिघलाने में जरा भी वक्त नहीं लगा ।उस जिले का नाम है नागौर और उस डीएम का नाम है.मुग्धा सिन्हा।


मैंने इस घटना का जिक्र इसलिए किया की......आगे जो कुछ आप पढ़ेगे...उससे उबलते जज्बातों पर काबू नहीं रख पाएंगे।छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जूटमिल इलाके में गौरवपथ का निर्माण कराना था।लेकिन गरीबों का मकान गौरवपथ के निर्माण में आड़े आ रही थी।मकान गरीबों का था इसलिए अतिक्रमण के दायरे में लाकर उसकी "ठीक से मरम्मत"कर दी गयी।तस्वीरों में देख लिजिए पता चल जाएगा....गरीबी मुफ्त में क्यों बदनाम है।जिस घर के एक एक समान से रहने वालों की यादें जुड़ी थी।वो घर पल भर में जमींदोज हो गया।जिस घर की दीवारों से हर सुख और दुख बांटा वो दीवारें धराशायी हो गयी।जिस दहलीज पर गरीबी का परदा था वो खुलेआम हो गयी।जिंदगी लग जाती है एक मकान को घर बनाने में...यहां तबियत से तोड़ने की जिद थी।वक्त बीत गया लेकिन वक्त की तासीर नहीं बदली।याद करिए परदा कहानी को।ठीक वहीं मंजर जूटमिल में था।फर्क बस इतना है कहानी में गरीबी का परदा था..और यहां गरीबी पर परदा था।कल्याणकारी अवधारणा पर बुलडोजर चलवा कर अंत्येष्टि कर दी गयी।रायगढ़ प्रशासन ने पूरी ताकत झोकं दी थी इस बस्ती को उजाड़ने में...जय सियाराम ...जै जै सियाराम । नीति-नियंताओं की मर्दानगी पर शक करने से पहले बस्ती के लोग कलेक्टर से बुलडोजर के शिष्टाचार की शिकायत करने पहुंचे।गरीबों की पैरवी करने हाउसिंग कमेटी के पूर्व डॉयरेक्टर रोशनलाल भी पहुंचे थे।डीएम का साक्षात दर्शन करके रोशनलाल ने बात रखी।रोशनलाल का कहना था कि तोड़े गए मकान नक्शा से बनावाया गया था।अगर नक्शा नगर निगम के अधिकारियों ने बनाया था तो उन्हे भी सजा मिलनी चाहिए।बस ये सुनते ही डीएम कटारिया की जुबान कटार बन गयी।सजा की मांग क्या कर दी जैसे डीएम से इस्तीफा मांग ली हो।बुजुर्ग रोशनलाल को भरे महफिल में गेटआउट बोल दिया।लेकिन दिलेर रोशनलाल भी डीएम को डपट पड़े।







कहा डीएम साहब कानून मत समझाइए।इतना सुनते ही डीएम बौखला गया।मर्यादा को सूली पर टांग कर आपा खो बैठे।निकल जाओ....अभी निकलो....निकलो ..निकलो ।इतने पर डीएम नहीं रूके... बॉडीगार्ड को बुलाने के लिए कई बार घंटी बजायी ...लेकिन कोई नहीं आया ।माहौल बिगड़ते देख खुद रोशनलाल कमरे से बाहर आ गए।"गुमान की परखनली में डीएम का जज्बात एसिड की तरह खौल रहा था"।घर तोड़ा अच्छा किया...भगा दिया अच्छा किया ...बेइज्जती किया वो भी अच्छा किया ...लेकिन डीएम साहब इंसाफ कहा हैं।आप को तो गेटआउट बोलने का "नेशनल परमिट " मिला है।आप की महानता का कोई जवाब नहीं है डीएम साहब ।धन्य है प्रभु और धन्य है आप की लीला।देख लिजिए ...इसी तरह निकम्मी नौकरशाही को सींचने के लिए अमित कटारिया को सरकार हजारों रूपए तनख्वाह देती
खैर...इसके बाद तो डीएम के खिलाफ रायगढ़ का जर्रा जर्रा खौल उठा।आवाज आयी.... इस डीएम का इलाज करो।सभी राजनीतिक दल सड़क पर उतर गए।मोर्चा खोल दिया गया।नारे बाजी होने लगी।मोमबत्ती बिग्रेड हाथ जलाने लगी।और पल भर में नायक से खलनायक बन गए..अमित कटारिया।इतिहास में अमर होने की कुछ बुनियादी शर्तें होती है जो अमित कटारिया में सिरे से गायब थी।ये भूल गए की कुर्सी से नहीं काम से किस्मत बदलती है।मुग्धा सिंन्हा जैसी डीएम विरले ही मिलेंगे जो सच के उजाले को साझा करने की हिम्मत दिखाते हैं।वरना अमिट कटारिया ने तो साबित कर दिया सत्ता में चाहे जो भी हो नीचे की मशीनरी का मिजाज आज भी पुरानी बदगुमानियों से ही संचालित होती है।रायगढ़ का जूटमिल तो बस एक सूचना है...जानकारी है।ये घटना आपके शहर में भी हो सकती है।अगर जूटमिल बस्ती में किसी माननीय का मकान होता तो क्या गौरवपथ का रास्ता बदल नहीं जाता।अगर डीएम से बात करने वाला कोई माननीय होता तो क्या डीएम "तोहफा कबूल "नहीं कराते।ये दो सवाल मैंने इसलिए उठाए....जब आप के शहर में अमिट काटरिया जैसे खलनायकों से पाला पड़े तो रायगढ़ की तरह ही उसे मुकम्मल जवाब मिले।

इतना ही नहीं अभी कल पंजाब की पहली महिला डीएसपी राका गेरा को रविवार दोपहर पुलिस ने एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। सीबीआई ने उसके घर की तलाशी ली तो वहां से करीब एक करोड़ रुपए नकदी, लाखों के आभूषण और विदेशी मूल की कई महंगी शराब की बोतले जब्त की हैं।
ReplyDeletebahut badhiya dost, dhokar rakh diya katariya ko. man ho raha hai ki is blog ki ek copy katariya ko bhej don. likhte raho, shandar adbhut likha hai.
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