Saturday, August 18, 2012

जब कांडा का फूटा भांडा...

कहा था पुलिस की जांच में मदद करेंगे।ये सब बकवास है।हम इसे बारे में और कुछ नहीं बता सकते।उनके साथ साजिश हो रही है।"जैसे शराफत की गंगा गोपाल कांडा की जुबान से ही निकलती है।शर्म आनी चाहिए गोपाल कांडा को जिसे अपने कुकृत्यों पर पर्दा डालने के लिए इससे अच्छी लाइन का इस्तेमाल नहीं कर सका""सियासत की सुरंगों से सीता बनके निकलना आसान नहीं है"।गीतिका की जान बच सकती थी अगर राजीति के संस्कार खोखले ना होते।गोपाल कृष्ण गोखले के देश में गोपाल कांडा के "शर्मकांड " से देश स्तब्ध है।नैतिक शिक्षा की निजी मान्यता कूटना कांडा का फलसफा है।हरियाणा सरकार की आंकड़ों की चौहद्दी को मजबूत करने वाला कांडा जैसा दूसरा गृह राज्यमंत्री कोई नहीं हुआ।कह सकते हैं "सुखांत दृश्यों के विस्मयकारी अदाकारी का चलता फिरता कारखाना।जिसमें दमड़ी नहीं चमड़ी की शर्त चलती थी"वाकया 5 अगस्त 2012 की है ।जब एमडीएलआर कंपनी की एक एयरहोस्टेस गीतिका शर्मा ने दिल्ली में सुसाइड कर लिया।गीतिका ने अपने सुसाइड लेटर में गोपाल कांडा और अरूणा चढ़्ढ़ा का नाम लिया था।इनके उपर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।6 अगस्त को गोपाल कांडा ने गृह राज्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।तब पुलिस से कहा था पुलिस की जांच में मदद करेंगे।ये सब बकवास है।हम इसे बारे में और कुछ नहीं बता सकते।उसके साथ साजिश हो रही है।पुलिस ने अरूणा चढ्ढ़ा को हिरासत में ले लिया लेकिन गुत्थी जबतक सुलझती कांडा फरार हो गया था।कांडा ने पहले रोहणी की निचली अदालत में फिर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।अग्रिम जमानत के लिए "दलीलों की खतौनी " देखकर रोहणी की अदालत ने कांडा के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी कर दी।वारंट के मुताबिक 24 अगस्त 2012 के भीतर पुलिस को कांडा को हाजिर करने का निर्देश मिला था।12 दिन तक कानून से कबड्डी खेलने के बाद 18 अगस्त 2012की रात को अचानक गोपाल कांडा का भाई गोविंद कांडा सैकड़ों समर्थकों के साथ "सिंघम के जयकांत सिक्रे " की तरह दिल्ली की अशोक विहार थाने पहुंचा।प्रगतिशील प्रवक्ता गोविंद कांडा ने कहा कि उसका भाई गोपाल कांडा दस मिनट बाद आकर सरेंडर करेगा(अभी के अभी )।इस बयान के बाद खलबली मच गयी।समर्थकों ने थाने के बाहर जमकर बवाल काटा(अभी के अभी )।बहस के दौरान कई मौके ऐसे आए "जब पुलिस को जयकांत सिक्रे को (अभी के अभी की तरह ) पीछे हटना पड़ा"एक-एक पल बीतता जा रहा था।मिनट बीता...घंटा बीता...एक घंटा बीता..दो फिर तीन फिर चार...चार घंटे पुलिस को छकाने के बाद गोपाल कांडा ने अपने न्यूज चैनल की गाड़ी में आकर सरेंडर कर दिया।"जो गोपाल कांडा 12 दिन से फरार था...कोर्ट का करेंट लगते ही उसके के पैरों में पहिए लग गए और आधी रात को हांफते -हांफते थाने पहुंचा"राजनीति को अपने शर्तों पर चलाने वाला कांडा की एक गुमनाम गुस्ताखी ने लोकतंत्र की हया पर सियासत की बेशर्मी को इतना ऊंचा उठा दिया कि राजनीति के खोखले संस्कार अनिवार्य सत्ता के तौर पर स्थापित हो गई है ।"पुलिस के पागलखाने को वृंदावन बनाने वाला कांडा भ्रम के खुशबू में अफना रहा है और एक गीतिका का परिवार है जो न्याय का बैराग लेकर बैठी है"इतिहास की किताबें बताती हैं कि बर्बरता और गुलामी का दौर बीत चुका है।हम आजाद दुनिया में रहते हैं।आप ही बताइए किताब में लिखी सारी बातें सच हैं तो सभ्यता के विकास के इस आधुनिक कालखंड में गीतिका के परिवार के हिस्से में क्या आया है।

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