Friday, April 1, 2011

देख तमाशा चालू है...

सौ.-मोनिका मोहन्या,जबलपुर


तरकारी में आज भी आलू है

देख तमाशा चालू है...

भ्रष्ट सरकारों के किले खड़े हो गए

नेताओं को खबर नही

नौकरशाह पस्त हैं

जनता को लगी दस्त है

यहां सब गर्दा है सब बालू है

देख तमाशा चालू है ...


चीरहरण का मार्केट है

गलाकाटना सफलता का शॉटकट है

जेब में सब के राम है

घनचक्कर हुए घनश्याम हैं

शिव भूलें हैं तांडव

गायब महाभारत के पांडव हैं

पाखंड के जंगल में शेर कोई न

यहां सभी गीदड़,लोमड़ी और भालू हैं

देख तमाशा चालू है...


मोबाइल पर सब अवेलबल है

रिचार्ज का जुगाड़ हो ,माथे पर क्यों बल हो

देशभक्ति,स्वामीभक्ति हई पुरानी

ये जमाना है फैंन्स का

भारतमाता हुई पुरानी

अब तो छाई शीला की जवानी है

पैदा नहीं होते भगत सिंह,आजाद,गांधी

फ़ैशन और भौड़ेपन की आंधी है

एसएमएस सी हो गयी ज़िंदगी

फेसबुक पर हो रही जज्बातों की कुकिंग

ट्विटर, ऑर्कुट,जीमेल और मौजूद याहू है

देख तमाशा चालू है ...

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