Friday, April 6, 2012

"उधार की हिम्मत" पर टिकी "डॉजियरबाजों की मर्दानगी"

जिस देश की सरकार आंतकवाद से मुकाबले करने के लिए "हिम्मत से ज्यादा फाइल बनाने पर यकीन करती हो...जिस देश की सरकार मुम्बई हमले के बाद "डोजियर के भरोसे आतंकवादियों का फांसी चढ़ाना चाहती हो...जिस देश की सरकार को आंतकवादियों पर कार्रवाई के लिए "पाकिस्तान से गिड़गिड़ाना पड़ता हो...ऐसे देश की "सरकार को "औकात दिखा कर होश में लाने वाले" अमेरिका के "एहसान " पर देश ने जो "गर्व " महसूस किया वो चुनावों में राहुल के खारिज होने से ज्यादा था"।मुम्बई हमले का मास्टर माइंड हाफिज सईद को सौंपने के लिए भारत पाकिस्तान से कहने lतक कि हिम्मत नहीं जुटा । अमेरिका के एफबीआई ने हाफिज सईद के उपर 50 करोड रूपए का इनाम रखा है। वो भी जिंदा या मुर्दा।अमेरिका ने मुर्दा देशों के लिए मुर्दा शब्द का इस्तेमाल किया और जिंदा देशों के लिए "जिंदा"।बाकि इनाम का क्या....इनाम तो हिम्मत दिखाने वालों को मिलती है।भारत इनमें से ना तो जिंदा पकड़ने के लिए पाकिस्तान से बोल सकता था...और ना ही मुर्दा।यूं कह ले कि अमेरिका ने भारत के सबूतों(मुम्बई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के खिलाफ सबूतों) की यही कीमत लगायी है।अगर थोड़ी भी हिम्मत होती तो भारत अमेरिकी रकम का दूना यानी एक अरब देने का ऐलान करता वो भी सिर्फ जिंदा पकड़ने के लिए।लेकिन मनमोहन सिंह तो "अंदर के तूफान को तौल रहे हैं"।उन लोंगो के जिन्हे मुम्बई हमले ने "लावारिस " बना दिया।बिखरे-टूटे लोगों के "उम्मीदों को नीबू मिर्ची की तरह लटकाने वाली मनमोहन सरकार मे जरा भी गैरत होती तो पाकिस्तान में बैठे नफरत के इस नागफनी को कुचलने के बजाय सबूतों की एक-एक बूंद से नहीं सींचते "









विदेशमंत्री ने जिस मुस्कान से कहा कि हम अमेरिका के कदम का स्वागत करते हैं।कृष्णा को उस मु्स्कान को हिना रब्बानी खार के लिए बचा के रखना चाहिए।नहीं संभाल पा रहे हों तो "मुस्कान की नशबंदी" करा लें।क्यों कि पाकिस्तान से बातचीत में मुस्कान की नहीं "पुरूषार्थ" की जरूरत होती है"।।अमेरिका के इस फैसले पर हाफिज सईद ने अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।फिर भी "हाफिज सईद ने अमेरिका की वजूद को झुलसाने वाली चुनौती देकर बता दिया है कि पाकिस्तान में आतंकवाद कैसे सर्वोदयी सभ्यता के तौर पर स्थापित है"।हाफिज सईद ने कहा है कि अमेरिका में दम हो तो मुझे पकड़ के दिखाए....मैं लाहौर में हूं।"हाफिज ने अमेरिका के खून को खौलाने के लिए ये बाते ओसामा की तरह टेप जारी करके नहीं बल्कि मीडिया से बातचीत में की"।खुलेआम अमेरिका को चुनौती देने वाला हाफिज ने ये भी कहा है कि उसे तो 50 करोड़ का इनाम मिलना चाहिए क्यों कि मैं अमेरिका को खुद अपना पता बता रहा हूं।"अमेरिका के अंदर के तूफान को तौलने वाले हाफिज के हैसियत का हिसाब जब भी होगा .."पाकिस्तान के विस्मयकारी समर्थन का वजन उसके "अंजाम" को हल्का करेगी।हाफिज के अतंकराज की खींची गयी लकीरों को अमेरिका, इंसानियत से बड़ा नहीं कर पाया तो इतिहास में अमेरिका का कद छोटा हो जाएगा "












लाहौर हाईकोर्ट से सर्टिफिकेट लेकर पाकिस्तान की सड़कों पर खुलेआम घूमने वाले हाफिज सईद को पाकिस्तान से मुर्दा मांगने की हिम्मत भारत की नहीं है।हिम्मत कहां से आएगी जब पूरी ताकत भ्रष्ट मंत्रियों को बचाने के लिए मनमोहन सरकार ने झोंक दिया हो।"डोजियर .....फाइल...दौरा ...सबूत ...पुख्ता सबूत..व्यक्तिगत दौरा ....के बहाने देश के दर्द को मजबूरियों की वजन से तौलनेवाले मनमोहन सिंह की खामोशी ने देश को आतंकवाद से ज्यादा चोट दी है।इनाम तो मनमोहन की खामोशी पर होनी चाहिए ""वरना हाफिज पर कार्रवाई के दबाव की अनेदखी करना आने वाले समय में सरकार से बलिदान मांगेगी "

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