इस
खबर को पढ़ने के बाद सत्यमेव
जयते की तरह भावनाओं का भूचाल
भले ना आए....लेकिन
दिल पर जरूर लगेगी।बर्बर
रवायतों का दौर सदियों से
जारी है लेकिन ओड़िशा में जो
कुछ हुआ उससे हैवानों पर यकीन
करना आसान हो गया ।संस्कार,परंपरा,रूढ़ियां
और दुनियादारी के मायाजाल
में आप भले ही फंस कर सामाजिक
हो गए हों लेकिन वहशी बनने के
लिए ऐसी कोई शर्त जरूरी नहीं।दर्द
की दरिया में डूबी ये घटना
भुवनेश्वर की है ।
जहां
एक गर्भवती महिला की जान लेने
के लिए दरिदों ने क्रूरता की
सारी हदें तोड़ डाली।मीनी
प्रधान नाम की इस महिला को जान
से मारने के लिए महानदी में
नीचे फेंक दिया।मीनी नदी के
बजाय़ नदी पर बने बैराज के
फ्लोर
पर जा गिरी।मौत से लड़ती मीनी
की ना बोलने की हालत थी ना हिलने
की हिम्मत।दर्द का अजायबघर
बनी मीनी एक-एक
सांस के लिए संघर्ष रही थी।ताकत
जुटा भी लेती जो बिना सहारे
के निकलना नामुमकिन
था।रात
के अंधेरे में फेंकी गयी मीनी
को मरा समझकर जाने वाले हैवानों
ये नहीं सोचा था कि मीनी अगर
जिंदा बच गई तो उनका बचना
नामुमकिन है।हुआ भी वही...सुबह
कि किरणें निकली तो कोहराम
मच गया।आमिर
के "सत्यमेव
जयते "
की
असर की
बात कर रहे थे और यहां
तो लिंगभेद की लड़ाई में मीनी
लहूलूहान होकर मौत की मेहरबानी
पर सिसक रही थी।तभी
नदी पर बने पुल से गुजरते राहगीर
की नजर
मीनी पर फरिश्ते की तरह
पड़ी।धीरे-धीरे
लोगों का हुजूम भी जुटने लगा।
लेकिन
ये
हुजूम तमाशा देखने वाली नही
बल्कि तस्वीर बदलने वाली थी
।धूप
कि किरणों से मीनी के शरीर मे
आयी हरकत को देखते ही
कहानी
समझ में आने लगी।जिम्मेदार
नागरिक की तरह लोगों ने फौरन
पुलिस और फायर ब्रिगेड को
बुलाया।मीनी को बचाने के लिए
जवानों को रेस्क्यू ऑपरेशन
करना पड़ा।लोंगो की मदद के
बदौलत घायल मीनी को सुरक्षित
बचा लिया गया।जुल्म
की तवारीख पर मीनी की तकदीर
भारी पड़ गयी। अस्पताल
में भर्ती मीनी ने जब जुबान
खोला तो एक-एक
शब्द सवालों के खंजर बन गए
थे।मीनी भुवनेश्वर में एक
रिटायर एडिश्नल जज एस.
के.
रॉय
के घर नौकरानी थी।जिसके साथ
रिटायर जज के बेटे वकील सत्यव्रत
रॉय ने जबरदस्ती शारीरिक संबंध
बनाया,फिर
शादी भी कर ली।लेकिन जज परिवार
ने अपने रूतबे पर कलंक लगते
देख सत्यव्रत रॉय की शादी
दूसरी लड़की से तय कर दी।इस
बीच जब
मीनी के गर्भवती होने की खबर
ससुरालवालों को लगी तो मीनी
से ज्यादा ससुरालवालों का
उठना बैठना दुश्वार हो गया।गोद
भराई पर घरवालों को उपहार
देना था ....खुशियां
बाटना था ...सपनों
को साझा करना था ....लेकिन
ससुरालवालों ने मीनी के दामन
को कांटों से भर दिया।ससुरालवाले
मीनी पर भ्रूण हत्या का दवाब
डालने लगे।जिंदादिल मीनी ने
भ्रूणहत्या से इनकार कर दिया।उसे
क्या पता था उसकी जिद...उसी
की जिंदगी पर बोझ बनने वाली
है।मीनी के इनकार करने पर
ससुरालवालों ने भाडे़ के
दरिदों को मीनी को जान से मारने
के लिए भेजा।लेकिन मौत
से दो -दो
हाथ करके मीनी समाज को आइना
दिखाया....और
समाज से ज्यादा ससुरालवालों
को।पुलिस
ने मीनी के मुल्जिम रिटायर
एडिश्नल जज एस.
के.
रॉय
की पत्नी और बेटे समेत केस से
जुड़े लोगों को गिरफ्तार
किया।मीनी और भुवनेश्वर तो
सिर्फ सूचना है ऐसी घटनाएं
किसी भी शहर में किसी भी बेटी
के साथ हो सकता है ।"मानव
विकास के प्रक्रिया को तमाचा
मारने वाली ये तस्वीर एक ऐसी
दस्तावेज है जो बेटियों को
दर्द के अजायबघर बनाने से
रोकेंगी।कहते हैं बेटियां
जन्नत से नूर भर लाती है और
यहां तो ससुरालवाले मौत सौगात
देने की कोशिश कर रहे थे।जज्बातों
को झकझोरने वाली ऐसी घटनाएं
समूची मानव सभ्यता के विकास
पर सवाल खड़े करती है।दौरे
के दस्तूर से समाज नहीं बदला
करते।सदियों बाद भी अगर यहीं
पहुंचना था तो बर्बर हुई है
समाज की चेतना। क्यों मीनी
अगर जिंदा है ये महज एक इत्तेफाक
है।आप बताइए कसूरवार कौन
है....आप
कहेंगे सत्यव्रत ...हम
कहेगें क्या एक सत्यव्रत का
सवाल है"।
जहां
एक गर्भवती महिला की जान लेने
के लिए दरिदों ने क्रूरता की
सारी हदें तोड़ डाली।मीनी
प्रधान नाम की इस महिला को जान
से मारने के लिए महानदी में
नीचे फेंक दिया।मीनी नदी के
बजाय़ नदी पर बने बैराज के
फ्लोर
पर जा गिरी।मौत से लड़ती मीनी
की ना बोलने की हालत थी ना हिलने
की हिम्मत।दर्द का अजायबघर
बनी मीनी एक-एक
सांस के लिए संघर्ष रही थी।ताकत
जुटा भी लेती जो बिना सहारे
के निकलना नामुमकिन
था।रात
के अंधेरे में फेंकी गयी मीनी
को मरा समझकर जाने वाले हैवानों
ये नहीं सोचा था कि मीनी अगर
जिंदा बच गई तो उनका बचना
नामुमकिन है।हुआ भी वही...सुबह
कि किरणें निकली तो कोहराम
मच गया।आमिर
के "सत्यमेव
जयते "
की
असर की
बात कर रहे थे और यहां
तो लिंगभेद की लड़ाई में मीनी
लहूलूहान होकर मौत की मेहरबानी
पर सिसक रही थी।तभी
नदी पर बने पुल से गुजरते राहगीर
की नजर
मीनी पर फरिश्ते की तरह
पड़ी।धीरे-धीरे
लोगों का हुजूम भी जुटने लगा।
लेकिन
ये
हुजूम तमाशा देखने वाली नही
बल्कि तस्वीर बदलने वाली थी
।धूप
कि किरणों से मीनी के शरीर मे
आयी हरकत को देखते ही
कहानी
समझ में आने लगी।जिम्मेदार
नागरिक की तरह लोगों ने फौरन
पुलिस और फायर ब्रिगेड को
बुलाया।मीनी को बचाने के लिए
जवानों को रेस्क्यू ऑपरेशन
करना पड़ा।लोंगो की मदद के
बदौलत घायल मीनी को सुरक्षित
बचा लिया गया।जुल्म
की तवारीख पर मीनी की तकदीर
भारी पड़ गयी। अस्पताल
में भर्ती मीनी ने जब जुबान
खोला तो एक-एक
शब्द सवालों के खंजर बन गए
थे।मीनी भुवनेश्वर में एक
रिटायर एडिश्नल जज एस.
के.
रॉय
के घर नौकरानी थी।जिसके साथ
रिटायर जज के बेटे वकील सत्यव्रत
रॉय ने जबरदस्ती शारीरिक संबंध
बनाया,फिर
शादी भी कर ली।लेकिन जज परिवार
ने अपने रूतबे पर कलंक लगते
देख सत्यव्रत रॉय की शादी
दूसरी लड़की से तय कर दी।इस
बीच जब
मीनी के गर्भवती होने की खबर
ससुरालवालों को लगी तो मीनी
से ज्यादा ससुरालवालों का
उठना बैठना दुश्वार हो गया।गोद
भराई पर घरवालों को उपहार
देना था ....खुशियां
बाटना था ...सपनों
को साझा करना था ....लेकिन
ससुरालवालों ने मीनी के दामन
को कांटों से भर दिया।ससुरालवाले
मीनी पर भ्रूण हत्या का दवाब
डालने लगे।जिंदादिल मीनी ने
भ्रूणहत्या से इनकार कर दिया।उसे
क्या पता था उसकी जिद...उसी
की जिंदगी पर बोझ बनने वाली
है।मीनी के इनकार करने पर
ससुरालवालों ने भाडे़ के
दरिदों को मीनी को जान से मारने
के लिए भेजा।लेकिन मौत
से दो -दो
हाथ करके मीनी समाज को आइना
दिखाया....और
समाज से ज्यादा ससुरालवालों
को।पुलिस
ने मीनी के मुल्जिम रिटायर
एडिश्नल जज एस.
के.
रॉय
की पत्नी और बेटे समेत केस से
जुड़े लोगों को गिरफ्तार
किया।मीनी और भुवनेश्वर तो
सिर्फ सूचना है ऐसी घटनाएं
किसी भी शहर में किसी भी बेटी
के साथ हो सकता है ।"मानव
विकास के प्रक्रिया को तमाचा
मारने वाली ये तस्वीर एक ऐसी
दस्तावेज है जो बेटियों को
दर्द के अजायबघर बनाने से
रोकेंगी।कहते हैं बेटियां
जन्नत से नूर भर लाती है और
यहां तो ससुरालवाले मौत सौगात
देने की कोशिश कर रहे थे।जज्बातों
को झकझोरने वाली ऐसी घटनाएं
समूची मानव सभ्यता के विकास
पर सवाल खड़े करती है।दौरे
के दस्तूर से समाज नहीं बदला
करते।सदियों बाद भी अगर यहीं
पहुंचना था तो बर्बर हुई है
समाज की चेतना। क्यों मीनी
अगर जिंदा है ये महज एक इत्तेफाक
है।आप बताइए कसूरवार कौन
है....आप
कहेंगे सत्यव्रत ...हम
कहेगें क्या एक सत्यव्रत का
सवाल है"।
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