Monday, April 18, 2011

जंतर-मंतर "छू"

जब भ्रष्टाचार का सीडीक हो तो समझ लिजिए अमर सिंह के श्रीमुख से कुतर्कों की धारा फूटने वाली है15/04/2011 को शांति भूषण को एक अंग्रेजी दैनिक के पत्रकार ने सीडी का वाला दिया।कहा गया कि इस सीडी में शांति भूषण की अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच हुई बातचीत कैद है।










































शांति भूषण को ये साजिश लगी लिहाजा उन्होने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज करा दी।गूगल पर सर्च कर लिजिएगा अमर सिंह के बयान के बाद शांति भूषण कितना सुर्खियों में थे।देश ने जज्बातों की दौलत जिस अन्ना पर लूटाय़ी थी वहीं अन्ना पहले ही बैठक में लूट गए।हुकूमत को हिलाने वाले हजारे एसी में बैठते ही जंतर का मंतर भूल गए।कहा गया कि की बिल के दायरे से मंत्री और जज बाहर रहेंगे।पता नहीं पहली बैठक में सियासत के भगोड़ों के सामने में अन्ना कितनी देर टिके होंगे।लेकिन इतना तो तय हैं कि एसी में उड़ने वाले गांधीवाद के विषाणु अन्ना के टोपी के रास्ते इरादों में घुल चुके हैं।सीडी से मची सनसनी का खुलासा हुआ तो पता चला सीडी के किरदार कोई और नहीं वहीं बाबर के कट्टर पुजारी अमर सिंह और मुलायम सिंह हैंप्रशांत ने कहा कि 2011 की सीडी में मुलायम सिंह की वही आवाज है जिस सीडी को उन्होने 2006 कोर्ट में जमा कराया था।2006 की सीडी में अमर सिंह और मुलायम सिंह के बीच बातचीत है।और उसी सीडी की मुलायम सिंह की आवाज इस सीडी से जोड़ा गया है। अगले दिन यानी 18/04/2011 को सपा के प्रवक्ता मोहन सिंह ने कहा कि मुलायम सिंह ने शांति भूषण से कभी बात नहीं की।ये तो रही अथ श्री सीडी कथा।अब आगे सुनिए।भष्टाचारियों की जमात को मैला की तरह ढ़ोने वाली कांग्रेस को अन्ना हजारे की कंपनी में शांति भूषण इसलिए चुभ रहे हैं, कि शांति भूषण ने ही 1975 में इंदिरा गांधी के खिलाफ राजनारायण का मोर्चा संभाला था।राजनारायण को जीत दिलायी थी।कोर्ट ने जब इंदिरा गांधी के चुनाव लड़ने पर रोक लगाया तो देश में कोहराम मच गया था।फिर देश पर आपातकाल का कलंक लगा।खैर इतिहास में तो गूंगी गुड़िया के कई टोटके दर्ज है।लेकिन वर्तमान की बहरी गुड़िया ने तो टोटके को ही भारतीय राजनीति का मर्ज बना दिया।इसी मर्ज का फर्ज अदा करने के लिए अमर सिंह सीडी के सूरमा बन बैठे।जब कांग्रेस को अपने भ्रष्ट नेताओं पर पहरा लगाने की नौबत आते दिखी तो पहरेदार पर पंजा मारने के लिए सीडी को ही हथियार बना लिया,और उजड़े हुए रियासत के लूटे हुए सुल्तान अमर सिंह को शिंखडी।इसी सियासी शिखंडी की आड़ में सीडी की हथियार को शांति भूषण पर दे मारी।सोचा था शांति भूषण पर वार करेंगे तो अन्ना को चोट लगेगी।लेकिन अन्ना तो चौकन्ना निकले।कहा कि मैं किसी के ईमानदारी की गांरटी नहीं से सकता।अन्ना का ये बयान नहीं है बल्कि उन कांग्रेसियों को गाली है जिनके वफादारी की दुर्गंध कुत्ते भी नहीं बर्दाश्त कर पाते हैंअमर सिंह ने सोचा था कांग्रेस के लिए बक-दलाली करेंगे तो उनका प्रताप मगध नरेश की तरह दशों दिशाओं में फैल जाएगाये भूल गए की ग्रह नक्षत्रों की चाल, स्वार्थों की खाल और सीडी की ढाल से ईमानदारी को नहीं रोका जा सकता।अब तो कांग्रेस की जाल में बटेर की तरह फंस गए है अमर सिंह।जिसकी चीख पर आप सिर्फ शर्मनाक अफसोस कर सकते हैं।वरना समाजवाद के खाल में छिपे दलालों से सियासी सहवास करने में कांग्रेस अपनी झिझक कबकी छोड़ चुकी है।सवाल ये नहीं है कि सीडी का निर्माता और निर्देशक कौन है।सवाल ये भी नहीं है कि सीडी में क्या है।सवाल ये है कि सीडी के साथ भारतीय राजनीति कबसे घूमने लगी ।

3 comments:

  1. जिसे देशभक्ति में कट्टरवाद दिखता है, केसरिया रंग के कपड़े पहनने वाले भगवा आतंकी के रूप में नज़र आते हैं, अलगाववादिओं के साथ कश्मीर को पाकिस्तान को देने की वकालत करते है, पेज 3 की पार्टी और शराब मे डूबकर रोज घर जाना, उनकी आदत में शुमार है। ऐसे लोगों को नीतीश, मोदी जैसे नेता ओर उनका विकास नही चाहिए, उनको राजनैतिक चुहलबाजी के लिए लालू (नौटंकी बाज़), अमर सिंह (शायरीबाज़), मुलायम जैसे लोग, या फिर अपनी छवि निखारने के लिए इन मीडिया के दलालों को ऐश करवाने वाले नेता (युवा गांधी), अभिनेता और राजनेता चाहिए। राष्ट्रवाद और विकास की बात करने वालों के खिलाफ तथाकथित सेकुलर लोग ज़रूर बोलते हैं, लेकिन जब देशद्रोही लोग सरे आम अलगाववाद, और पाकिस्तान के गीत गाते है तब ये अपने बिलों में घुसे रहते हैं और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीतिक बिसात बिछाने में लग जाते है।
    अवनीश सिंह

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  2. bahut badhiya vijay, tumhari kalam ki dhar to din par din aur paini hot ja raha hai. likhte raho.

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  3. bahut ummda guptaji !!!

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