झक्क मार रहे "सरकारी सेकुलरों " को मोदी को गरियाने में जो "कृतज्ञता" हासिल होती है उसे हासिल करने में ना जाने कितनी बार ….....गांधी के तलवे चाटने पड़ते। यही वजह है कि कांग्रेस में मोदी को "हाथोंहाथ " गरिया कर "परम पद" पाने की होड़ मची रहती है।हो सकता है आने वाले दिनों में "कांग्रेस की सदस्यता के लि
ए मोदी को गाली देने का तरीका
अनिवार्य" हो। इसी "परंपरागत तरीके" पर तो दिग्विजय सिंह को "चाणक्य का तमगा" मिला है।जिसे सीडी के जरिए हथियाने के लिए अमर सिंह जैसे "अति दुर्लभ दलाल" घुसपैठियों की तरह आगे आए हैं।अमर सिंह की गिनती...किसमें होती है।बताना मुश्किल होगा।लेकिन इतना तय है कि जिस प्रजाति में गिनती होती होगी वो प्रजाति इस कलंक के बोझ से झुक गयी होगी।
पहले मुर्गी आई की पहले अंडा।इस सवाल का जवाब समझना अब जरूरी है।क्योंकि अब ये सवाल बदल गया है।मसलन,पहले अमर सिंह आए की पहले सीडी , कांग्रेस में कोई "एक आदर्श" है या "पूरी कांग्रेस आदर्श" है, पहले सोनिया हैं कि पहले कांग्रेस, दिग्विजय सिंह राहुल गाँधी के गुरू हैं या गांधी छाप कांग्रेस के चेले।ऐसे कुछ "राजनीतिक सूडोकू " है जिसे सुलझाना बाकी है।अन्ना छाप अनशन से भ्रष्टाचारियों की "सेहत" का ख्याल रखने के लिए नेता "जयचंद्रावतार" लेते रहेंगे।रही बात सेकुलरों की तो उनकी "कार्यक्षमता " पर सवाल उठा कर हम मोदी की तारीफ नहीं करना चाहते।नपुंसक सेकुलरों का इलाज करना बेहद जरूरी है। इस कटेगरी में वो सारे बक – दलाल ,धर्मपोंगु और विशिष्ट और अनंत का ज्ञान कराने वाले रोगी आते ही जिनका "इलाज"दिन में तीन बार मोदी जपने से ही होगा।वो अलग बात है की मोदी का नाम लेते ही "धर्म परिवर्तन " हो जाएगा । दिग्विजय सिंह ने इस गुस्ताखी को कई बार किया है...इसलिए उन्हे "पवित्र " होने के लिए "सेकुलरों का मक्का आजमगढ़ " में मत्था टेकना पड़ा।लेकिन बिडंबना देखिए,दिग्विजय सिंह के पैर पड़ते ही संजरपुर भी "शर्मनिरपेक्ष " हो गया।दिग्विजय के काफीले पर उलेमा ए हिन्द ने काले झंडे दिखाए।और तो और उलेमा ए हिन्द ने घोषणा कर दी वो चुनावों में प्रत्याशी उतारेगी।दिग्विजय सिंह ने आजमगढ़ जाकर "बना बनाया खेल" बिगाड़ दिया।"रूठे रब" को मनाने के लिए भोंदू युवराज ने आजमगढ़ का दौरा किया।लेकिन "कुछ हासिल " होने से पहले ही संजरपुर के लोगों ने खुदा हाफिज बोल दिया।यूपी का चुनाव आते देख दुर्योधन डिपार्टमेंट के डीलर दिग्विजय सिंह अब अन्ना के शरण में पहुंचे हैं। कहा कि अन्ना को भ्रष्टाचार से लड़ाई की शुरूआत यूपी से करनी चाहिए।जैसे आन्ध्र प्रदेश में "कांग्रेस का राम – राज " हो।वैसे अन्ना के "मासूम तजुर्बे "को धकियाने वाले अमर सिंह और दिग्विजय सिंह ही नहीं है।उनके आस पास कई ऐसे "तजुर्बे के दलाल" है जिनके वजह से वफादारी की परिभाषा बदल रही है।इनमें से एक है स्वामी अग्निवेश....जिनको नक्सलियों की दलाली करने के लिए एक मात्र "सरकारी लाइसेंस " आवंटित हैं। बाकी लोगों का नाम गांव बताके भाव क्या बढ़ाना।खुद्दारी का दम भरने वाले ऐसे ही "प्रतिभावान" लोगों से प्रतिशोध उतारने के लिए एक ऐसे सियासी पार्थ की जरूरत है जो इनको ठीक करे।
यह देश ही देशद्रोहियों, अपहरणकर्ताओ, आतंकवादियों, डाकुओं , अवसरवादियों, आम आदमियाँ का माँस नोंच-नोंच का खाने वाले भेंडियों, गीदडो, कौओ और औरत की लाज लूटने वाले दलालो, बलात्कारियों, भूखे भेंडियों , भांडो, नचनियो ,ठगो, अफसरो, कर्मचारियों, लुटेरो, काला धन जमा करने वाले चोरो, दुर्बुढ्ढि , दुष्टाचार, भ्रष्टाचार और ब्याभिचार करने वाले घमंडी नेताओ, फिरौती वालो, मुजिरिमो तथा जिनका मन लालची और घटिया लोगो के प्रति समर्पित है ! यही लोग चैन और आराम की नींद सो सकते है और इस देश की जनता का लुभावने तरीके से खून पी सकते है या फिर बलात्कार कर सकते है / बाद में देश की तरक्की का मूल-मंत्र- गाँधी-नेहरू को बताकर जनता को गुमराह करेंगे और जनता के साथ बलात्कार करेंगे !!
ReplyDeleteyeh bina niti ki rajniti hai guptaji ...yahan "khuddari"aur "gaddari"mein koi antar nai hai ... sahi kaha aapne "siyasi parth" ki kami jaldi puri honi chahiye varna is "MAHA BAHART" per "HAMARA BHARAT" SIRF SHARMINDA HOKAR REH JAYEGA ...
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