Sunday, June 10, 2012

सोनिया के "त्याग" पर सचिन का "तमाचा"

उस हिन्दुस्तान के ख्वाब अब भी जिंदा हैं...सच होने के इंतजार में ।लेकिन घना अंधेरा देखा तो नजऱें बदल ली। आज नजरें भी बदल गयी हैं और नजारे भी....राहुल के पड़ोस में सचिन को शिफ्ट करने की "घोर कोशिश " करके कांग्रेस ने "राहुल के आत्मसमर्पण की घोषणा " कर दी है ।सचिन को राहुल के पड़ोसी बनाने की "कांग्रेसी प्लानिंग " फेल हो गयी है।हारे हुए कांग्रेसी का पड़ोसी बनने से अच्छा.....महंगाई में जी रहे आम आदमी का दिल जीतना सचिन के लिए ज्यादा आसान लगा। सचिन ने सरकारी बंग्ला ठुकरा कर सोनिया गांधी के "त्याग" पर "तमाचा" मारा है।सोनिया ने पीएम की कुर्सी छोड़ी है सचिन ने तो पूरा बंग्ला ठुकरा दिया।....किसका त्याग बड़ा है फैसला आप का।सचिन ने कहा है ये बंग्ला उस गरीब को दिया जाए जिसे ज्यादा जरूरत है।सचिन अपने खर्चे पर होटल में रहना ज्यादा पसंद करेंगे।सचिन देश के खून पसीने से कमाई करके टैक्स भरने वाली जनता को तवज्जो दिया...ताकि उस बंग्ले की वजह से कर दाताओं के पैसे बर्बाद ना हो...इस "सोच " ने राहुल और सचिन के नजरिए के "फर्क " को साफ कर दिया।सचिन के "इस त्याग पर राहुल की त्योरियां चढ़े या ना चढ़े "...लेकिन एक बात तय है सचिन ने नो बाल पर जो छक्का मारा है....वो राहुल के "हाथ " में नहीं आने वाली। क्योंकि अच्छी किस्मत और बुरी नियत एक साथ ज्यादा देर नहीं ठहरती।वैसे भी लगता है राहुल के किस्तम में बुरी संगत ही लिखी है।राहुल को ना तो अच्छा पड़ोसी मिल रहा है और ना ही पॉलिटिक्स सीखाने वाला।सचिन ने ऐसा करके मनमोहन सरकार के "सिय़ासी दामाद " और नेताओं की उस जमात को तमाचा मारा है जो दिखावे की फिजूलखर्ची के लिए "जुबानी कहकहे " लगाते हैं।किश्तों में कांग्रेस की सच्चाई सामने आने से पहले ही सचिन ने गुगली फेंक कांग्रेस के सामने संकट पैदा कर दी है।कांग्रेस को जीतने का शौक तो है...लेकिन बाजी खेलने का सलीका नहीं मालूम।सचिन ने कांग्रेस के मिशन को भांपकर "बंग्ले का रडीमेड पार्सल " जो राहुल के चमचों के लिए छोड़ा है उस पर देश को फख्र है।संसदीय इतिहास के खलनायकों के पड़ोस में बंग्ला ना लेकर सचिन ने महानायक से माननीय के बीच महानता की लकीर को और बड़ी कर दी है।ऐसी लकीर जिसे ना राहुल पार कर सकते हैं ना पूरी कांग्रेस।एक बात और सीढ़ी पर सोने से जैसे कोई कबीरदास नहीं बन जाता वैसे ही सचिन को पड़ोसी बनाकर राहुल खलनायक से नायक नहीं बन सकते।

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