इसे कहते हैं गरीबी में पैंट गिला।पहले बेइज्जती की नमकीन खिला कर बेशर्मों के सरदार ने उसूलों की पोटली उड़ा दी।अब आम बजट से देश के गरीबों की इज्जत पर इरादों की ऐसी इमारत खड़ी कर की है जिसमें सलाना 1.80 लाख की औकात रखने वालों से झाड़ू पोछा कराया जा रहा है।अर्थ का ये अनर्थशास्त्र देश के गरीबों के गाल झन्नाटेदार तमाचा है।बड़े बड़े वीआईपी अस्पतालों में अब सर्विस टैक्स लगेगा
।जैसे शौक पूरा करने के लिए कोई अस्पताल जाता हो।पता नहीं किस सरकारी अस्पताल में एसी लगी है।अगर किसी गरीब को जान बचाने के लिए बड़े अस्पताल में भर्ती कराना पड़े तो पहले सियासत के इस हरिश्चन्द्र को कर देना होगा।जैसे सर्विस टैक्स देकर जी गये तो क्या ...मर गये तो क्या।राज्य की सारी कल्याणकारी अवधारणा गयी तेल लेने।आगे सुनिए होटलों में एक हजार का कमरा लेने पर सर्विस टैक्स देना होगा।प्रणव बाबू बताएंगे....देश के किस होटल में एक हजार से कम का कमरा मिलता है।एलपीजी.किरोसीन और खाद में 2012 से कैश सब्सिडी देंगे।दाद देनी होगी दादा की जिन्होने गरीबी की जाति तय करने में मर्दानगी दिखाई है।अब सब्सिडी मिलेगी पूछ – पूछ।सब्सिडी की बोझ से दादा इतना दब गये थे कि जनता की जेब पर सऱेआम डाका डाल दिया।जैसे तीन सौ साठ रूपये में एक एलपीजी गैस सिलेंडर खरीदने वालों को सीधे दूना देना पड़ सकता है।क्योंकि सरकारी रहमोकरम की चाबुक अब सब पर नहीं चलेगा।उन्ही पर चलेगा जो दादा की दादागिरी से बच जाएंगे।सिलेंडर छोड़िए खाद पर भी सरकार कैश सब्सिडी देगी।जैसे इनके सब्सिडी के एहसान चले किसान फसल उगाते थे।दाद भूल गये कि इंजीनियर,डॉक्टर बनना आसान है लेकिन इस कृषिप्रधान देश में किसान बनना आसान नहीं है।सरकार में एफसीआई के काहिल अफसरों की फौज को ढ़ोने वाली कृषिमंत्रालय तो किसानों को मेहनत पर पलीता लगाने में राष्ट्रपति पुरस्कार मिला है।महंगाई पर जुबान पर ताला लग जाता है।28 फरवरी 2011के एक घंटे के बजट भाषण में दादा तो जैसे महंगाई को सरकारी अमानत घर में बंद करके आए थे।जनता रामायण की तरह प्रणव बाबू को सुन रही थी।और वित्तमंत्री जनता की जेब पर चूना लगा रहे थे।भाषण नहीं दिया है...देश के गरीबों को दुत्कारा दिया है दादा ने।महज 2060 रूपये की बचत दिखा कर दादा ने मरने वालों से भी टैक्स वसूलने का तजुर्बा दिखा दिया।गठबंधन धर्म से राजकोष को 1लाख 76 हजार का चूना लगा।लेकिन जिन्होने चूना लगाया है उनसे सरकार वसूल लेती तो उनकी गिनती हिजड़ों की जमात में नहीं होती और ना ही महंगाई के आगे नपुंसक होती।दादा ने तो जोश में तलवार ही उछाल दी।खैर...1.80 लाख रूपये तक टैक्स मुक्त रखने के बदले दादा ने कैश सब्सिडी देने का ऐसा खेल खेला है जिसमें जनता सिर्फ शर्मनाक अफसोस कर सकती है।
Monday, February 28, 2011
बैंड बजाया बजट...
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JORDAR LIKHA HAI BHAI..........
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