Thursday, December 13, 2018
Thursday, November 29, 2018
इस एंकर ने बाबरी मस्जिद बनवाने का ठेका लिया है...?
तस्वीर में दाएं तरफ दिख रहे शख्स को तो आप पहचानते ही होंगे। ये हैं सुमित अवस्थी। कहने के लिए बड़े नामी एंकर है। सूझ-बूझ रखते हैं और अपने को रसूखदार समझते हैं। 'हम तो पूछेंगे' में इतना पूछ लिया था कि चैनल ने ही इनको पूछना बंद कर दिया। इन दिनों बाबरी मस्जिद बनवाने का कीड़ा काटा हुआ है। इसलिए बाबरी के पैरोकार बनकर घूम रहे हैं। ABP NEWS पर 'राम सम्मेलन' में योगगुरु रामदेव से पूछ रहे थे बाबरी मस्जिद कहां बनेगी? अब इन्हें कौन बताए कि मुगल आक्रांता बाबर के नाम पर भारत में बाबरी मस्जिद के लिए क्यों स्थान दिया जाए? राम हमारे पूर्वज थे उनका मंदिर बनना चाहिए या बाबरी मस्जिद बनना चाहिए, क्या ये बात सुमित अवस्थी को नहीं पता है? क्या सुमित अवस्थी किसी शो में मौलवियों से मक्का में शिव मंदिर बनाने के लिए सवाल पूछने की हिमाकत दिखा सकते हैं?
केजरीवाल का कुचक्र
वाह रे केजरीवाल... बदला लेने का इससे अच्छा तरीका तो कुछ हो ही नहीं सकता है। सुना था तुम राजनीति बदलने आये थे, लेकिन मिर्ची का असर इस कदर होगा सोचा भी नहीं था। दिल्ली पुलिस से बदला लेने के लिए तुम्हारी सरपरस्ती में पल रहे ये 21 विधायकों वाली यह चिट्ठी तुम्हारी चिरकुटई की इंतेहा है। उन शहीद पुलिसकर्मियों ने तुम आपियों का क्या बिगाड़ा था जो उनके करोड़ों के मुआवजा को रोकने के लिए शीर्षासन कर रहे हो। एक तरफ तुम्हारे बिगड़ैल विधायक सोमनाथ भारती न्यूज चैनल पर महिला एंकर को धंधे पर बैठाने की बात करता है और दूसरी तरफ तुम्हारे विधायक चिट्ठी लिखकर शहीद परिवारों के मिलने वाले मुआवजा न मिले उसके लिए मुहिम चला रहे हैं। थोड़ी भी राजनीतिक शर्म बची हो तो अपनी इन हरकतों पर विराम लगा लो नहीं तो ये दिल्ली है अपने पर आ गयी तो मुह छुपाने के लिए जगह नहीं मिलेगी।
====================================
ध्यान दें - आम आदमी पार्टी के विधायकों से अरविंद केजरीवाल ने एक चिट्ठी लिखवाई है जिसमें स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि कार्य के दौरान शहीद होने पर जवानों और अधिकारियों के परिवार को जो 1 करोड़ रुपए का मुआवजा सरकार देती है, वो इन्हें न दिया जाए। इस चिट्ठी पर आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं।
====================================
ध्यान दें - आम आदमी पार्टी के विधायकों से अरविंद केजरीवाल ने एक चिट्ठी लिखवाई है जिसमें स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि कार्य के दौरान शहीद होने पर जवानों और अधिकारियों के परिवार को जो 1 करोड़ रुपए का मुआवजा सरकार देती है, वो इन्हें न दिया जाए। इस चिट्ठी पर आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं।
ये मोह मोह के धागे....
जब वक्त फैसला करता है तो जिंदगी की वकालत कहां चलने वाली....वक्त ने हमारे लिए भी कुछ ऐसा ही इशारा किया..रामोजी फिल्मसिटी से रुखसती का वक्त आ गया । ETV ज्वाइन करने के लिए 2008 में पहली बार हैदराबाद आया था... पता नहीं था कैसा शहर है... लेकिन ये अनजान शहर कब जिंदगी का स्थाई पता बन गया ये पता ही नहीं चला। हर मुश्किल हालात में जिंदगी की मायूसी को चुंबक की तरह सोख लेता था। आज एक बनी बनाई दुनिया से नाता टूट रहा था...बिछुड़ने की बेला में खुद को तैयार करना बहुत मुश्किल हो रहा था..जिस शहर में 10 साल रहा उस शहर में आज आखिरी दिन था...आखिरी बार ऑफिस गए। सब लोग वही थे... लेकिन मैं वहां होके भी नहीं था। कुछ मिल गए... कुछ छूट गए। आखिरी बार रोस्टर देखा... फिर सबका अभिवादन किया... कैंटीन से गुजरते हुए... सिक्योरिटी वाले को सलाम ठोकते हुए... बस में आकर बैठ गया... बस चल दी पेड़, पर्वत, नजारे देखते-देखते मोह के बंधन में कैद 10 साल की यादों का सावन बरसता चला गया... इसी उधेड़बुन में जैसे ही रामोजी फिल्मसिटी गेट से बस निकली.... आंखें भर गई थीं। पीछे मुड़-मुड़ कर देखता रहा। जैसे आज कोई आत्मा देह से निकल रही थी। रामोजी सर को सलाम किया...रामोजी जैसे इंसान दुनिया में बिरले मिलेंगे। हम भी उन हजारों लोगों में से थे जिनको रामोजी सर की छत्रछाया में प्रगति करने का मौका मिला। माइक्रो मैनेजमेंट के जादूगर रामोजी सर को नमन करते हैं । रामोजी के बस से आखिरी बार भाग्यलता तक का सफऱ किया । अगले दिन सुबह मुझे सिकन्दराबाद स्टेशन जाना था... मैं भाग्यलता बस स्टैंड पहुंचा... 290 नंबर की बस का इंतजार था...यही वो बस है जो मुझे घर पहुंचाने के लिए दूर से पहचान लेती थी... हमेशा की तरह कंडक्टर ने पूछा..टिकट- टिकट... मैंने बोला सिकंदराबाद। आखिरी बार सिकंदराबाद जा रहे थे... रास्ते में सबकुछ याद आ रहा था... वो NTR गार्डन...वो कोट्टी... वो एबिड्स... वो पंजा गुट्टा... वो हाईटेक सिटी... वो दिलसुखनगर, वो एलबी नगर, वो हयात नगर... वो वनस्थलीपुरम... वो सोहन टी स्टाल की चाय...मेरा फेवरिट रामाकृष्णा ग्लिटरेटी थिएटर ....ना जाने कितने ऐसे जगह हैं जो हमेशा के लिए मुस्कुराने की वजह बन गए। सोचते-देखते...सिकंदराबाद स्टेशन पहुंचे... 1 घंटे के इंतजार के बाद प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर सुपरफास्ट एक्सप्रेस दानापुर सिकंदराबाद आई... ट्रेन में सामान रखा...दिल धड़क रहा था... सबकुछ फिल्म की तरह दिमाग में घूम रहा था। इसी बीच हल्की सी हरकत हुई ... ट्रेन चल चुकी थी.. खिड़की खोली.. आंखें भर गई थी...जिस शहर ने मेरी 'आंखें खोली' थी उसी आंखों से शहर को 'देखता' चला गया । इन अनमोल यादों को लेकर एक मुसाफिर की तरह....मैं जिंदगी के 'अगले स्टेशन' की ओर बढ़ गया । अलविदा हैदराबाद
(कुछ शुभ चिंतकोंं की यादों ने आज स्पर्श किया )
...जब योगी सरकार में हुआ 'चमत्कार
एक जमाना था जब हमारे मऊ जिले के कोपागंज कस्बे में ट्रांसफार्मर जल जाता था तो उसे बदलने में कम से कम 2 सप्ताह इंतजार करना पड़ता था। पता ही नहीं चलता था...ट्रांसफार्मर कहां से आता था...कब आता था...कैसे आता था...और कौन लाता था । ट्रांसफार्मर बदलने के लिए कम से कम 5 दिन तक तो चंदा एकट्ठा किया जाता था। जिसे बिजली विभाग के अधिकारियों को कुर्सी से 'हिलने' के लिए दिया जाता था । मजाल देखिए... चंदा लेने के बाद भी ट्रांसफार्मर आने की पक्की तारीख नहीं बताते थे । भागा- दौड़ी के बाद ट्रांसफार्मर आने की सूचना आने में 3 दिन लग जाता था । हमारे चंदनपुरा मोहल्ले में इतनी सरगर्मी किसी के घर दुल्हन आने पर भी नहीं होती थी जितना ट्रांसफार्मर आने पर । खैर, हील हुज्जत के बाद ट्रांसफार्मर आने के इंतजार में हर मिनट बेसब्री से गुजरता था । अब लाइट आई...तब लाइट आई । इसी अफनाहट में एक दिन और बीत जाता था । फिर पता चलता था ट्रांसफार्मर में अभी तार जोड़ना है । उसमें भी एक दिन लग जाता था। तार जुड़ने की खबर मिलते ही घरों में सारे स्विच ऑन हो जाते थे.. आज लाइट से मुलाकात होने वाली है । लेकिन दिन के बाद रात हो जाती थी और रात भी बिना लाइट के निकल जाती थी । अगले दिन सुबह पता चलता था ट्रांसफार्मर में तेल डालकर गर्म करना होता है उसमें भी एक दिन लगेगा । तेल डालने के बाद लोगों की नजरें बल्ब और ट्यूबलाइट पर होती थी...इंतजार में दिन बीत जाता था...धीरे धीरे रात हो जाती थी..लोग सोने की तैयारी करते थे...तभी भक्क से लाइट आती थी...अगले दिन क्या क्या करना है कैसेट की तरह दिमाग चलने लगता था। पूरे कोपागंज में पावरलूम, टीवी, मोटर, चक्की सब चालू हो जाता था । ये जमाना अभी अखिलेश सरकार तक था। जमाने से जमी हुई इस 'खूंखार' सच्चाई से 10 दिसंबर को कोपागंज का एक बार फिर पाला पड़ा । 7 ट्रांसफार्मर एक साथ जल गए । पूरे कोपांगज में हाहाकार मच गया था । लेकिन इस बार लोग लाइट नहीं....योगी सरकार की नियति देखना चाहते थे । क्योंकि योगी सरकार ने वादा किया था जले हुए ट्रांसफार्मर 48 घंटे में बदले जाएंगे । हुआ भी वही । 48 घंटे में 7 ट्रांसफार्मर एक साथ बदले गए । 13 दिसंबर को लाइट आ गई । इस 'चमत्कार' को देखने वालों को यकीन हो गया उन्होंने जिस 'अंधेरे' और 'अंधेरगर्दी' को दूर करने के लिए बीजेपी को वोट दिया था वो सफल हो गया ।
सियासत@खुद्दारी पर भारी खुदगर्जी
भोपाल के रोशनपुरा झुग्गी बस्ती में रहने वाला 'कौशल शाक्य' इन दिनों फिर चर्चा में हैं। पहली बार कौशल उस समय चर्चा में आया, जब वह सड़कों पर अखबार बेचते हुए भोपाल में 'राहुल गांधी' से मिला था। राहुल गांधी ने कौशल से अखबार खरीदकर उसे 1000 रुपए का नोट दिया लेकिन कौशल ने यह पैसे लेने से मना कर दिया और पेपर का वाजिब दाम उनसे मांगा। तब 'राहुल गांधी' इस बच्चे की खुद्दारी से प्रभावित होकर उसके 'पढ़ाई' का जिम्मा अपने सर लेने की घोषणा किये। कौशल को शुरुआती दिनों में दो महीने तक 1 हजार रुपए पढ़ाई के लिए कांग्रेस पार्टी से मिला और फिर वह भी बंद हो गया। इसके बाद कौशल तब चर्चा में आया जब मदद का श्रेय लेने के इस राजनीतिक ड्रामे में 'स्मृति ईरानी' की इंट्री हुई। स्मृति ईरानी ने 'केन्द्रीय विद्यालय' में कौशल के 'दाखिले' के लिए एक 'पत्र' लिखा, जो पूरी तरह से निष्प्रभावी रहा। 'राहुल गांधी' के दोबारा भोपाल दौरे से कौशल फिर से चर्चा में है। राहुल के पुराने वायदों को याद दिलाने और सहयोग की उम्मीद लिए कौशल का परिवार उनसे मिलने पहुंचा। यहां लाख 'कोशिशें' और 'मिन्नतों' के बाद भी कौशल और उसके परिजनों को राहुल गांधी से मिलने नहीं दिया गया।
यह तो तय हैं, कौशल की 'खुद्दारी' से प्रभावित होने वाले राहुल भले ही अपने वायदे भूल गये हों लेकिन अब उनकी 'खुदगर्जी' ने कौशल सहित कई परिवारों को यह सीख अच्छी तरह याद हो गयी कि ये करिश्माई नेता किसी के नहीं हो सकते।
यह तो तय हैं, कौशल की 'खुद्दारी' से प्रभावित होने वाले राहुल भले ही अपने वायदे भूल गये हों लेकिन अब उनकी 'खुदगर्जी' ने कौशल सहित कई परिवारों को यह सीख अच्छी तरह याद हो गयी कि ये करिश्माई नेता किसी के नहीं हो सकते।
Subscribe to:
Posts (Atom)






