एक जमाना था जब हमारे मऊ जिले के कोपागंज कस्बे में ट्रांसफार्मर जल जाता था तो उसे बदलने में कम से कम 2 सप्ताह इंतजार करना पड़ता था। पता ही नहीं चलता था...ट्रांसफार्मर कहां से आता था...कब आता था...कैसे आता था...और कौन लाता था । ट्रांसफार्मर बदलने के लिए कम से कम 5 दिन तक तो चंदा एकट्ठा किया जाता था। जिसे बिजली विभाग के अधिकारियों को कुर्सी से 'हिलने' के लिए दिया जाता था । मजाल देखिए... चंदा लेने के बाद भी ट्रांसफार्मर आने की पक्की तारीख नहीं बताते थे । भागा- दौड़ी के बाद ट्रांसफार्मर आने की सूचना आने में 3 दिन लग जाता था । हमारे चंदनपुरा मोहल्ले में इतनी सरगर्मी किसी के घर दुल्हन आने पर भी नहीं होती थी जितना ट्रांसफार्मर आने पर । खैर, हील हुज्जत के बाद ट्रांसफार्मर आने के इंतजार में हर मिनट बेसब्री से गुजरता था । अब लाइट आई...तब लाइट आई । इसी अफनाहट में एक दिन और बीत जाता था । फिर पता चलता था ट्रांसफार्मर में अभी तार जोड़ना है । उसमें भी एक दिन लग जाता था। तार जुड़ने की खबर मिलते ही घरों में सारे स्विच ऑन हो जाते थे.. आज लाइट से मुलाकात होने वाली है । लेकिन दिन के बाद रात हो जाती थी और रात भी बिना लाइट के निकल जाती थी । अगले दिन सुबह पता चलता था ट्रांसफार्मर में तेल डालकर गर्म करना होता है उसमें भी एक दिन लगेगा । तेल डालने के बाद लोगों की नजरें बल्ब और ट्यूबलाइट पर होती थी...इंतजार में दिन बीत जाता था...धीरे धीरे रात हो जाती थी..लोग सोने की तैयारी करते थे...तभी भक्क से लाइट आती थी...अगले दिन क्या क्या करना है कैसेट की तरह दिमाग चलने लगता था। पूरे कोपागंज में पावरलूम, टीवी, मोटर, चक्की सब चालू हो जाता था । ये जमाना अभी अखिलेश सरकार तक था। जमाने से जमी हुई इस 'खूंखार' सच्चाई से 10 दिसंबर को कोपागंज का एक बार फिर पाला पड़ा । 7 ट्रांसफार्मर एक साथ जल गए । पूरे कोपांगज में हाहाकार मच गया था । लेकिन इस बार लोग लाइट नहीं....योगी सरकार की नियति देखना चाहते थे । क्योंकि योगी सरकार ने वादा किया था जले हुए ट्रांसफार्मर 48 घंटे में बदले जाएंगे । हुआ भी वही । 48 घंटे में 7 ट्रांसफार्मर एक साथ बदले गए । 13 दिसंबर को लाइट आ गई । इस 'चमत्कार' को देखने वालों को यकीन हो गया उन्होंने जिस 'अंधेरे' और 'अंधेरगर्दी' को दूर करने के लिए बीजेपी को वोट दिया था वो सफल हो गया ।

No comments:
Post a Comment