ये है हमारा कोपागंज...। मऊ जिला मुख्यालय से मात्र 15 मिनट लगता है यहां पहुंचने में। इस कस्बे में खिलाड़ी भी मिलेंगे और नामचीन कलाकार भी, कोट पैंट पहने अधिकारी भी दिखेंगे और लुंगी पहने बुनकर भी। लेकिन कुछ चीजें हैं जो यहां नहीं दिखने चाहिए वो भी दिख जाता है। चंदनपुरा, हुंसापुरा, दोस्तपुरा,फत्तनपुरा, चौक, भरतमिलाप, ठठेरीगली, रॉयल बुक स्टाल ऐसी दर्जनों जगह हैं जहां से आप गुजरेंगे तो आपका स्वागत जगह-जगह कूड़ों के लगे ढेर से होगा। इन सड़कों पर उन्हीं लोगों के प्रतिष्ठानों का कूड़ा अधिकत दिखता है जो सबसे ज्यादा सफाई पसंद होने का ढोंग करते हैं। यहां रहने वालें लोगों के लिए कूड़ा फेंकने का कोई निश्चित समय ही नहीं है... जब मन में आया.. सड़क को ही डस्टबीन बना देते हैं। मोदी जी अगर कोपागंज आकर भी लोगों से स्वच्छ भारत की अपील करें तो भी इनपर कोई असर नहीं होगा। जिस कोपागंज को यहां पुराने लोगों ने पहचान दिलाई और नए लोग बुलंदी पर ले गए उसी कोपागंज पर कूड़े का कालिख लगी है ।
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नोट- अरे भाई अगर आप अपने आस-पास स्वच्छता रखोगे तो इससे मोदी जी का स्वास्थ्य सुधरे या न सुधरे अपने कस्बे की ही सेहत दुरुस्त होगी। आइये मिलकर हम सभी कोपागंज के निवासी एक कदम स्वच्छता की तरफ बढ़ाएं और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी छोटा सा योगदान दें..



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