भोपाल के रोशनपुरा झुग्गी बस्ती में रहने वाला 'कौशल शाक्य' इन दिनों फिर चर्चा में हैं। पहली बार कौशल उस समय चर्चा में आया, जब वह सड़कों पर अखबार बेचते हुए भोपाल में 'राहुल गांधी' से मिला था। राहुल गांधी ने कौशल से अखबार खरीदकर उसे 1000 रुपए का नोट दिया लेकिन कौशल ने यह पैसे लेने से मना कर दिया और पेपर का वाजिब दाम उनसे मांगा। तब 'राहुल गांधी' इस बच्चे की खुद्दारी से प्रभावित होकर उसके 'पढ़ाई' का जिम्मा अपने सर लेने की घोषणा किये। कौशल को शुरुआती दिनों में दो महीने तक 1 हजार रुपए पढ़ाई के लिए कांग्रेस पार्टी से मिला और फिर वह भी बंद हो गया। इसके बाद कौशल तब चर्चा में आया जब मदद का श्रेय लेने के इस राजनीतिक ड्रामे में 'स्मृति ईरानी' की इंट्री हुई। स्मृति ईरानी ने 'केन्द्रीय विद्यालय' में कौशल के 'दाखिले' के लिए एक 'पत्र' लिखा, जो पूरी तरह से निष्प्रभावी रहा। 'राहुल गांधी' के दोबारा भोपाल दौरे से कौशल फिर से चर्चा में है। राहुल के पुराने वायदों को याद दिलाने और सहयोग की उम्मीद लिए कौशल का परिवार उनसे मिलने पहुंचा। यहां लाख 'कोशिशें' और 'मिन्नतों' के बाद भी कौशल और उसके परिजनों को राहुल गांधी से मिलने नहीं दिया गया।
यह तो तय हैं, कौशल की 'खुद्दारी' से प्रभावित होने वाले राहुल भले ही अपने वायदे भूल गये हों लेकिन अब उनकी 'खुदगर्जी' ने कौशल सहित कई परिवारों को यह सीख अच्छी तरह याद हो गयी कि ये करिश्माई नेता किसी के नहीं हो सकते।
यह तो तय हैं, कौशल की 'खुद्दारी' से प्रभावित होने वाले राहुल भले ही अपने वायदे भूल गये हों लेकिन अब उनकी 'खुदगर्जी' ने कौशल सहित कई परिवारों को यह सीख अच्छी तरह याद हो गयी कि ये करिश्माई नेता किसी के नहीं हो सकते।

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